भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मध्यप्रदेश दौरे को लेकर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि नितिन नबीन विकास का दिया जलाने नहीं, बल्कि विनाश का दिया जलाने आ रहे हैं। वहीं राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को लेकर भी जीतू पटवारी ने कई सवाल उठाए और कांग्रेस की आगामी शिक्षा नीति का दावा किया।
बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जीतू पटवारी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शिक्षा की सुरक्षा और छात्रों की गूंज अभियान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर देश में युवाओं के सामने शिक्षा और बेरोजगारी जैसी समस्याएं हैं, तो ऐसे में प्रधानमंत्री के विकसित भारत और विश्व गुरु भारत बनाने के लक्ष्य पर भी सवाल खड़े होते हैं।
जीतू पटवारी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भारत दुनिया में 80वें नंबर पर है। उनके मुताबिक करीब 10 करोड़ छात्र उच्च शिक्षा से बाहर हैं, जबकि 12 करोड़ बच्चे स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इस स्थिति को रोकने की जवाबदेही किसकी है।
पटवारी ने मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में 49 हजार स्कूल बंद हुए हैं और पूछा कि सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के लिए सरकार की क्या नीति है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में बच्चों का ड्रॉपआउट रेट 32 प्रतिशत से ज्यादा है, जबकि उच्च शिक्षा में सरकारी विश्वविद्यालयों के 81 प्रतिशत पद खाली हैं। उन्होंने देश में 152 बार पेपर लीक होने का भी दावा किया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 2028 में जब कांग्रेस की सरकार बनेगी, तब केजी से पीजी तक की शिक्षा मुफ्त करने का काम किया जाएगा। वहीं राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए पैसे जमा कराने को लेकर उठ रहे सवालों पर पटवारी ने कहा कि देश में नेता प्रतिपक्ष पहले भी कार्यक्रम करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के लिए कांग्रेस से अभी 10 लाख लिए हैं तो 20 लाख और ले लो, लेकिन बीजेपी और आरएसएस के हजारों कार्यक्रम हुए हैं, क्या उनसे भी फीस जमा कराई गई है?
वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मध्यप्रदेश दौरे पर जीतू पटवारी ने एक बार फिर तंज कसते हुए कहा कि वे विकास का दिया जलाने नहीं, बल्कि विनाश का दिया जलाने आ रहे हैं। अब पटवारी के इन बयानों पर बीजेपी की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और शिक्षा तथा ‘छात्रों की गूंज’ को लेकर सियासी बहस किस दिशा में जाती है, यह देखना अहम होगा।

