सनातन संस्कृति बनाम पश्चिमी संस्कृति! ‘छात्रों की गूंज’ पर उषा ठाकुर का बड़ा बयान, कांग्रेस पर लगाए आरोप

इंदौर। इंदौर में राहुल गांधी के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज होती नजर आ रही है। इसी बीच बीजेपी विधायक उषा ठाकुर ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कार्यक्रम की संस्कृति और आयोजन को लेकर सवाल उठाए हैं। उषा ठाकुर का आरोप है कि जो लोग देश के कानून को नहीं मानते और वंदे मातरम गाने से परहेज करते हैं, वे पश्चिमी संस्कृति को ही अपना आधार मानते हैं।

दरअसल, राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कई सिंगर और कलाकार मंच पर अपनी प्रस्तुतियां देने वाले हैं और इसे लेकर तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। बीजेपी की ओर से कार्यक्रम में पाश्चात्य संस्कृति और नाच-गाने को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी मुद्दे पर उषा ठाकुर ने कहा कि जो लोग देश के कानून को नहीं मानते और वंदे मातरम गाने से परहेज करते हैं, उनके बारे में हम क्या कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी अपने कार्यक्रमों में सनातन संस्कृति से जुड़े आयोजन करती है, जबकि जो लोग इसे मानते ही नहीं हैं, वे पश्चिमी संस्कृति के आधार पर कार्यक्रम करेंगे।

वहीं बीजेपी प्रवक्ता राकेश यादव ने भी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के बीच किस तरह का संदेश पहुंचाने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। राकेश यादव ने कार्यक्रम के आयोजन, जमीन के किराए और राजनीतिक उद्देश्य को लेकर भी कई आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, यह देखना बाकी है।

दरअसल, प्रशासन की ओर से रीजनल पार्क के मैदान में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति दी गई है। लेकिन पिछले कई दिनों से कार्यक्रम स्थल पर तंबू लगाने और दूसरे काम शुरू होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि आयोजन के लिए तीन दिन की अनुमति मांगी गई थी, जबकि कार्यक्रम की तैयारियां कई दिनों से चल रही हैं। ऐसे में जमीन के वास्तविक उपयोग की अवधि के आधार पर किराए में बदलाव की बात भी सामने आ रही है।

अब इस पूरे मामले में सियासत और तेज हो गई है। एक तरफ बीजेपी कार्यक्रम की संस्कृति और आयोजन को लेकर सवाल उठा रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस की ओर से इसे युवाओं और छात्रों से संवाद का कार्यक्रम बताया जा रहा है। ऐसे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम सिर्फ छात्रों के मुद्दों तक सीमित रहेगा या इंदौर की सियासत में भी इसकी गूंज सुनाई देगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

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