इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में राहुल गांधी के संभावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क नजर आ रहे हैं। वीआईपी सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने जस्टिस जे.एस. वर्मा आयोग की सिफारिशों का हवाला देते हुए कार्यक्रम के आयोजकों के सामने सख्त सुरक्षा मानक रखे हैं। इन सुरक्षा शर्तों को पूरा करना कार्यक्रम के आयोजन के लिए अहम माना जा रहा है।
दरअसल, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद राजनीतिक कार्यक्रमों और वीआईपी सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए जस्टिस जे.एस. वर्मा आयोग का गठन किया गया था। आयोग की सिफारिशों में राजनीतिक रैलियों और बड़े आयोजनों के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर कई दिशा-निर्देश दिए गए थे। अब पुलिस प्रशासन इन्हीं सुरक्षा मानकों का हवाला देते हुए राहुल गांधी के संभावित कार्यक्रम की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है।
कार्यक्रम स्थल पर भीड़ को वीआईपी क्षेत्र से दूर रखने के लिए मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही एंट्री और एग्जिट प्वाइंट को व्यवस्थित रखने, भीड़ की क्षमता को नियंत्रित करने और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुख्ता क्राउड मैनेजमेंट प्लान तैयार करने की बात कही जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आयोजकों की जवाबदेही भी तय की जा रही है। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा में किसी तरह की चूक होने पर स्थानीय आयोजकों को जिम्मेदार माना जा सकता है। यही वजह है कि आयोजन समिति सुरक्षा प्रोटोकॉल से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी करने में जुटी हुई है।
सबसे बड़ा सवाल अब कार्यक्रम की अनुमति को लेकर है। अगर तय सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ, तो प्रशासन की ओर से अनुमति में बदलाव या उसे रद्द करने की स्थिति भी बन सकती है। हालांकि, कार्यक्रम को लेकर अंतिम प्रशासनिक स्थिति और अनुमति की शर्तों पर पूरी तस्वीर आधिकारिक निर्णय के बाद ही साफ होगी।
फिलहाल राहुल गांधी के संभावित इंदौर दौरे को लेकर राजनीतिक हलचल के साथ सुरक्षा तैयारियां भी तेज हो गई हैं। अब देखना होगा कि आयोजक प्रशासन की ओर से तय सुरक्षा मानकों को किस तरह पूरा करते हैं और ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर अनुमति पर अंतिम फैसला क्या होता है।

