मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज में सराफा कारोबारी मोहित टंच की फर्मों पर हुई 72 घंटे की GST छापेमारी अब बड़े विवाद में बदल चुकी है। तीन दिन तक चली कार्रवाई के बाद जिस तरह मामला निपटाया गया, उसने कर विभाग की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे हैरान करने वाला दृश्य तब सामने आया, जब देर रात जांच खत्म कर बाहर निकलते ही GST के अधिकारी कैमरे को देखते ही उल्टे पैर भागते दिखे। जब रात 1 बजे वे दोबारा बाहर आए तो पहले कहा कि वे मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं हैं, और बाद में आधे-अधूरे जवाब देकर रिकवरी का आंकड़ा 52 लाख बताकर बात को खत्म करने का प्रयास किया। लेकिन बड़ा सवाल यह है—जब जांच में 35 लाख की कर चोरी सामने आई, तो मामला सिर्फ 52.91 लाख जमा कराकर कैसे निपटा दिया गया?
मऊगंज के बड़े सराफा कारोबारियों—बीएम ओरनामेंट्स और एसएम ज्वेलर्स—पर लंबे समय से बिना पक्के बिल और वाउचर के कारोबार की शिकायतें थीं। GST टीम ने 72 घंटे तक दस्तावेज खंगाले और जांच में सामने आया कि फर्मों ने 99 प्रतिशत तक इनपुट टैक्स क्रेडिट का उपयोग किया, जबकि दो वित्तीय वर्षों में सिर्फ 3.25 लाख कैश जमा किया गया। कच्चे बिल, गलत वाउचर और स्टॉक में भारी अंतर साफ इशारा कर रहे थे कि टैक्स चोरी गंभीर स्तर पर हुई है।
लेकिन जब तीसरे दिन रात 10:30 बजे अधिकारी बाहर आए और मीडिया के सवालों का सामना किया, तो उनके व्यवहार ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया। वे कैमरा देखकर वापस अंदर चले गए, और फिर देर रात लौटकर भी साफ जवाब देने से बचते रहे। सवाल उठ रहा है कि क्या तीन दिन की इस कार्रवाई का मकसद सिर्फ दबाव बनाकर ‘सेटलमेंट’ कराना था? क्या अधिकारी कोई बड़ा सच छुपा रहे हैं? और इतनी भारी अनियमितताओं के बावजूद सिर्फ 52 लाख में मामले का निपटारा कैसे हो गया? मऊगंज का ये पूरा मामला अब कर विभाग की कार्यशैली पर गहरा सवाल बनकर खड़ा है।

