सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में आज उस वक्त आक्रोश फूट पड़ा जब आदिवासी युवती शिवानी बरेला की मौत के मामले में परिजन और आदिवासी संगठन सड़कों पर उतर आए। भेरुंदा नसरुल्लागंज के शासकीय अस्पताल में इलाज के दौरान हुई शिवानी की मौत को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया गया। प्रदर्शनकारियों का साफ आरोप है कि यह मौत स्वाभाविक नहीं बल्कि डॉक्टर की गंभीर लापरवाही का नतीजा है।
परिजनों के मुताबिक शिवानी बरेला को इलाज और ऑपरेशन के लिए भेरुंदा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन के दौरान ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर की लापरवाही से उसकी हालत बिगड़ती चली गई और कुछ ही समय में उसकी मौत हो गई। मामला तब और ज्यादा सनसनीखेज हो गया जब शिवानी के अंतिम संस्कार के दौरान उसके पेट से कैंची निकली, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
इस घटना के बाद आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश है। कलेक्ट्रेट पहुंचे परिजनों और समाज के लोगों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि डॉक्टर रुक्मणी गुलहरिया को तत्काल राजपत्रित सेवा से बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए। साथ ही मृतक परिवार को उचित मुआवजा और न्याय दिया जाए।
आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने डॉक्टर को बचाने की कोशिश की या कार्रवाई में देरी हुई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। उनका कहना है कि शासकीय अस्पतालों में आदिवासियों की जिंदगी के साथ हो रहा खिलवाड़ अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब सवाल यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और शिवानी बरेला के परिवार को कब तक इंसाफ मिल पाता है।

