इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अभी लोगों के जेहन से उतरा भी नहीं था कि इंदौर विकास प्राधिकरण के दफ्तर की खतरनाक लापरवाही सामने आ गई जहां मेहमानों और आम लोगों को एक्सपायरी आरओ पानी परोसा जा रहा है।
IDA कार्यालय में रखी बोतलों पर पैकिंग डेट 23 नवंबर 2024 दर्ज है और बोतल पर साफ लिखा है कि निर्माण तिथि से 90 दिन के भीतर उपयोग करना चाहिए यानी फरवरी 2025 के बाद यह पानी इस्तेमाल लायक नहीं था लेकिन 2026 में भी वही बोतलें दफ्तर में परोसी जा रही हैं।
दफ्तर के एक कर्मचारी के मुताबिक अधिकारी खुद घर से पानी लाते हैं और मीटिंग या वीआईपी आगमन पर ही इन बोतलों का इस्तेमाल कराया जाता है यानी जो पानी अफसर खुद पीना सुरक्षित नहीं समझते वही दूसरों को पिलाया जा रहा है।
हर साल सरकारी पैसे से पानी की बोतलों की खरीद होती है लेकिन एक्सपायरी डेट देखने वाला कोई नहीं और स्टॉक की निगरानी या स्वास्थ्य सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने वाला भी कोई नजर नहीं आता जिससे सप्लायर माल उतार देता है और बिल पास हो जाते हैं।
भागीरथपुरा की मौतों के बाद जांच और सुधार के दावे जरूर हुए थे लेकिन IDA दफ्तर की तस्वीर बताती है कि सिस्टम ने कुछ नहीं सीखा और सरकारी दफ्तरों में आज भी सुरक्षित पानी तक की व्यवस्था नहीं है।
एक्सपायरी पानी पीने से फूड प्वाइजनिंग और संक्रमण जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ता है और सवाल उठता है कि अगर यही पानी किसी बीमार व्यक्ति, बुजुर्ग या बच्चे तक पहुंच जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले में IDA के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, क्या पानी सप्लाई करने वाले ठेकेदार पर केस दर्ज होगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

