पति ड्रग्स सप्लायर, पत्नी बनी कानून की गवाह, प्री-वैलेंटाइन पर भेजा जेल का गिफ्ट, पुलिस कमिश्नर से शिकायत के बाद हुई कार्रवाई

इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर से सामने आया यह मामला बताता है कि जब एक महिला गलत के खिलाफ खड़ी होने की ठान लेती है तो रिश्तों की दीवार भी उसे रोक नहीं पाती, मल्हारगंज इलाके में रहने वाली एक अकाउंटेंट महिला ने अपने ही पति के खिलाफ ड्रग्स कारोबार की शिकायत कर उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया और साफ कहा कि पति से ज़्यादा उसके लिए कानून ज़रूरी है।

महिला ने पुलिस कमिश्नर को दी शिकायत में बताया कि उसका पति घर को ड्रग्स का अड्डा बनाकर गांजा और पाउडरनुमा नशे की दर्जनों पुड़िया रखता था और महालक्ष्मी नगर की एक पान दुकान के जरिए कॉलेज और हॉस्टल की लड़कियों तक नशा सप्लाई करता था, घर में दो नाबालिग बच्चियां रहती हैं और इस गंदे धंधे का असर बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर पड़ रहा था, विरोध करने पर पति और ससुराल वाले उसे धमकाते थे और 4 फरवरी को बेरहमी से मारपीट कर उसकी आंख के ऊपर 7 से 8 टांके तक आ गए।

महिला ने पहले मल्हारगंज थाने में शिकायत की थी और पुलिस घर तक पहुंची, लेकिन आरोप है कि सामने रखे गांजा और ड्रग्स के बावजूद न तो जब्ती हुई और न ही एनडीपीएस एक्ट में कोई कार्रवाई की गई, जिससे स्थानीय थाने की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए।

नशामुक्ति अभियान से प्रेरित होकर महिला ने 9 फरवरी को पति के घर से बाहर होने पर घर में रखे ड्रग्स का वीडियो बनाया और सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय को भेज दिया, शिकायत मिलते ही कमिश्नर कार्यालय सक्रिय हुआ और तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

कमिश्नर के निर्देश पर विजय नगर ज़ोन के जरिए लसूड़िया थाना पुलिस ने मल्हारगंज थाना क्षेत्र में ही दबिश दी और देर रात घर से भारी मात्रा में गांजा और ड्रग्स की पुड़िया जब्त कर आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया, इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर स्थानीय थाने की निष्क्रियता पर सवाल उठने लगे हैं।

पीड़िता के वकील कृष्ण कुमार कुन्हारे का कहना है कि महिला ने पत्नी धर्म से ऊपर कानून को रखा और कई युवाओं की जिंदगी बर्बाद होने से बचाई, वहीं डॉक्टर रूपाली राठौर ने बताया कि पीड़िता सबूतों के साथ उनके पास पहुंची थी और शिकायत कमिश्नर तक पहुंचते ही तुरंत मदद मिली।

एक तरफ शहर में नशे के खिलाफ अभियान चल रहे हैं तो दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होना सिस्टम की कमजोर कड़ी को उजागर करता है, अगर महिला हिम्मत न दिखाती तो यह धंधा यूं ही चलता रहता और इस पूरी कहानी की सबसे मजबूत कड़ी वही मां है जिसने अपने बच्चों और समाज को नशे से बचाने के लिए अपने ही पति के खिलाफ आवाज उठाई।

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