भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में एमबीबीएस छात्रा रोशनी की आत्महत्या का मामला जोरदार तरीके से उठा। विधायक सेना महेश पटेल ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत कहा कि रोशनी के परिजनों को समय पर मौत की सूचना नहीं दी गई और परिजनों की गैरमौजूदगी में पोस्टमार्टम किया गया। उन्होंने इस पूरे मामले में हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस जांच पर सवाल खड़े किए।
स्वास्थ्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि रोशनी निजी हॉस्टल में रह रही थी और उसका पोस्टमार्टम Gandhi Medical College में पांच डॉक्टरों की टीम ने किया। उन्होंने बताया कि सिर पर किसी प्रकार की चोट नहीं पाई गई है। छात्रा का मोबाइल फोन भी जांचा गया, जिसमें उसने व्हाट्सएप ग्रुप में लिखा था कि उसे एमबीबीएस की पढ़ाई समझ नहीं आ रही।
मंत्री ने कहा कि छात्रा तीसरी मंजिल की ओर जाती हुई सीसीटीवी में दिखाई दी है और उसके पास से एसिड की बोतल मिली। जिस कमरे में वह मिली, उसका दरवाजा अंदर से बंद था। फिलहाल हत्या के कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिले हैं। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित की गई है।
विधायक सेना महेश पटेल ने CBI जांच की मांग दोहराते हुए कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और आदिवासी समाज में आक्रोश है। इस पर मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि पोस्टमार्टम के दौरान मृतका की माता मौजूद थीं और एसआईटी में तीन महिला अधिकारी शामिल हैं। सरकार इस बात को लेकर गंभीर है कि ऐसी घटना दोबारा न हो, लेकिन फिलहाल CBI जांच की जरूरत नहीं है क्योंकि एसआईटी सक्षम है।
विधायक राजन मंडलोई ने सवाल उठाया कि मेडिकल कॉलेजों में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, नए छात्रों की काउंसलिंग क्यों नहीं कराई गई और क्या जातिगत भेदभाव के एंगल से जांच हुई है। इस पर मंत्री ने कहा कि जांच जारी है और जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई होगी।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि रोशनी आदिवासी परिवार से थी और पढ़ाई में मेधावी थी, ऐसे में आत्महत्या पर संदेह है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। सदन में इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई और राजनीति गरमा गई, जबकि सरकार ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी पारदर्शिता से होगी।

