इंदौर। इंदौर में कलेक्टर जनसुनवाई के दौरान उस वक्त सनसनी फैल गई जब भागीरथपुरा निवासी यतीन्द्र यादव ने खुद को मानसिक रूप से प्रताड़ित बताते हुए इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी। युवक ने कलेक्टर को दिए ज्ञापन में आरोप लगाया कि उनके साथ गाली-गलौच की गई, बातचीत का ऑडियो वायरल किया गया, नौकरी छिन गई और समाज में बदनामी के बाद अब जीने का सहारा नहीं बचा है।
यतीन्द्र यादव का कहना है कि वे पिछले 15 वर्षों से नगर निगम में ईमानदारी से कार्यरत थे और उनकी सेवा अवधि में कभी कोई प्रतिकूल टिप्पणी या आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं हुआ। उनके अनुसार 23 दिसंबर 2024 को निगम के आदेश पर वे खातीवाला टैंक क्षेत्र में एक निर्माणाधीन मकान पर नोटिस तामील कराने पहुंचे थे। आरोप है कि वहां मौजूद लोगों ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया। नियमानुसार नोटिस चस्पा करने के दौरान स्थानीय पार्षद कमलेश कालरा से फोन पर बात करवाई गई, जहां कथित तौर पर नोटिस वापस लेने का दबाव बनाया गया और मना करने पर गाली-गलौच की गई।
युवक का आरोप है कि बातचीत का ऑडियो वायरल कर दिया गया, जिससे उनकी छवि धूमिल हुई और बाद में उन्हें नौकरी से भी हटा दिया गया। ज्ञापन में यह भी दावा किया गया कि पार्षद ने फोन पर अपने प्रभाव की बात कही और कार्रवाई की धमकी दी।
यतीन्द्र यादव ने बताया कि उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। पिता दर्जी का काम करते हैं और पिछले एक साल से पूरा परिवार मानसिक और आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उनका कहना है कि वे आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाना चाहते, इसलिए कानून के तहत इच्छा मृत्यु की अनुमति मांग रहे हैं।
इस घटना ने शहर में प्रशासनिक व्यवस्था और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

