एमपी बजट सत्र 2026 में भोपाल मास्टर प्लान से लेकर जजों और पत्रकारों की सुरक्षा तक गूंजे सवाल

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 के आठवें दिन सदन में कई अहम मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। राजधानी भोपाल के मास्टर प्लान में देरी, मेट्रो परियोजना, श्रमिकों के भुगतान, गौ मांस पर जीएसटी, जजों की सुरक्षा और पत्रकार सुरक्षा कानून जैसे विषयों पर सरकार को घेरा गया।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भोपाल मास्टर प्लान और मेट्रो को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आपसी टकराव के कारण योजनाएं अटकी हुई हैं और बड़े शहरों की जनता के साथ अन्याय हो रहा है। पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि लगभग 20 साल से लंबित मास्टर प्लान का असर हर नागरिक और व्यापारी पर पड़ रहा है तथा अधिकारियों की लापरवाही से 22 करोड़ का टेंडर बढ़कर 72 करोड़ तक पहुंच गया। उन्होंने पूरे प्रदेश में इंदौर मॉडल लागू करने और मेट्रो को पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जोड़ने की बात कही।

गौ मांस पर जीएसटी को लेकर भी सदन में बवाल हुआ। जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि उनके प्रश्न का सीधा जवाब नहीं दिया गया और सरकार ने केंद्र का हवाला दिया।

नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि इंदौर और भोपाल मेट्रो के अंडरग्राउंड निर्माण से कब्रिस्तान को कोई नुकसान नहीं होगा और आधुनिक तकनीक से काम किया जाएगा। उन्होंने कांग्रेस विधायक आतिफ अकील के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि केवल अस्थायी ढांचा प्रभावित होगा, जिसे बाद में पुनर्निर्मित किया जाएगा।

वन विभाग से जुड़े मुद्दे पर भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा ने श्रमिकों के भुगतान और अकाउंट नंबर सार्वजनिक न करने पर सवाल उठाए। वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक करना मर्यादा के विरुद्ध है, हालांकि व्यक्तिगत रूप से जानकारी दी जा सकती है।

प्रश्नकाल के दौरान जजों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा। भाजपा विधायक हरिशंकर खटीक ने प्रत्येक न्यायिक मजिस्ट्रेट को गनमैन देने की मांग की, जिस पर मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि आवश्यकता के अनुसार सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है।

वहीं कांग्रेस विधायक विपिन जैन ने पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की समयसीमा पूछी। मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने जवाब दिया कि राज्य सरकार पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है और अन्य राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर मसौदा तैयार किया जा रहा है।

बजट सत्र के आठवें दिन सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप के बीच कई अहम मुद्दों पर राजनीतिक तापमान ऊंचा बना रहा।

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