PWD में 140 करोड़ के सड़क घोटाले का खेल? 9 इंजीनियरों पर गिरी गाज, ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के आरोप में नोटिस जारी

भोपाल। मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी में करोड़ों रुपये के कामों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि जिन सड़कों की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी अभी ठेकेदारों पर थी, उन्हीं सड़कों के लिए दोबारा निर्माण और व्हाइट टॉपिंग के प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिए गए। मामला करीब 140 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। इस खुलासे के बाद विभाग ने 9 इंजीनियरों और अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है।

जांच में सामने आया कि भोपाल, रायसेन, ग्वालियर, नर्मदापुरम, मंदसौर और मुरैना जिलों की कुल 19 सड़कों के लिए नए निर्माण और मरम्मत के प्रस्ताव भेजे गए थे, जबकि ये सड़कें अभी भी परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में थीं। नियमों के अनुसार इस अवधि में सड़क की किसी भी खराबी की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार या निर्माण एजेंसी की होती है और मरम्मत का खर्च भी उसी को उठाना पड़ता है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों ने करोड़ों रुपये के नए प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए भेज दिए।

रिपोर्ट के अनुसार भोपाल-रायसेन क्षेत्र की 8 सड़कों पर 51 करोड़ 65 लाख रुपये की व्हाइट टॉपिंग का प्रस्ताव भेजा गया। वहीं अन्य अधिकारियों द्वारा भी अलग-अलग जिलों की सड़कों के लिए करोड़ों रुपये के निर्माण और मरम्मत प्रस्ताव तैयार किए गए। कुल मिलाकर 19 सड़कों पर लगभग 140 करोड़ रुपये के कार्यों की मंजूरी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।

मामला उजागर होने के बाद विभाग हरकत में आया और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया। पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता संजय मस्के के अनुसार इन सड़कों के निर्माण और व्हाइट टॉपिंग के प्रस्ताव स्वीकृत भी हो चुके थे, लेकिन बाद में पता चला कि सड़कें अभी परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर नियमों को नजरअंदाज कर ये प्रस्ताव कैसे तैयार किए गए और किसे फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी।

इधर मंदसौर में भी इस मामले की गूंज सुनाई दे रही है। पूर्व कार्यपालन यंत्री आदित्य सोनी का नाम सामने आने के बाद चर्चा तेज हो गई है। हालांकि वर्तमान कार्यपालन यंत्री नितेश सुलिया का कहना है कि उन्हें अभी तक शासन की ओर से कोई आधिकारिक नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन यह जानकारी जरूर है कि परफॉर्मेंस गारंटी वाली सड़कों के लिए प्रस्ताव भेजे गए थे। शासन से पत्र मिलने के बाद पूरे मामले की जांच की जाएगी।

अब सभी की नजर विभागीय जांच पर टिकी है। यदि अधिकारियों के जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही भी की जा सकती है। इस पूरे मामले ने पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली, सड़क निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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