इंदौर। स्वच्छता के मामले में देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका इंदौर अब भिक्षावृत्ति मुक्त शहर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने जिले की पूरी राजस्व सीमा में भिक्षावृत्ति पर प्रतिबंध लगाने का प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब इंदौर में न सिर्फ भीख मांगना प्रतिबंधित रहेगा, बल्कि भिखारियों को भीख देना और उनसे सड़क या चौराहों पर सामान खरीदना भी प्रतिबंध के दायरे में आएगा।
प्रशासन ने इस अभियान में आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक खास पहल भी शुरू की है। अगर कोई व्यक्ति भिक्षावृत्ति में लिप्त लोगों के बारे में सही और सटीक जानकारी प्रशासन को देता है, तो उसे एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
भिक्षावृत्ति से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। नागरिक भिक्षावृत्ति से संबंधित सही सूचना महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी दिनेश मिश्रा को दे सकते हैं। प्रशासन के मुताबिक, सूचना सही पाए जाने पर सूचनाकर्ता को एक हजार रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा।
वहीं, आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे इंदौर जिले में लागू कर दिया गया है और 31 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य इंदौर को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाना है और इसके लिए आम जनता का सहयोग बेहद जरूरी है।
अब देखना होगा कि प्रशासन की इस सख्ती और एक हजार रुपये के इनाम वाली पहल का जमीन पर कितना असर होता है और क्या इंदौर वास्तव में भिक्षावृत्ति मुक्त शहर बनने की दिशा में एक और बड़ी मिसाल कायम कर पाता है।

