दिग्विजय सिंह के ‘अपमान’ पर कांग्रेस में बवाल! समर्थकों ने खोला मोर्चा, बीजेपी ने भी साधा निशाना

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई तनातनी का वीडियो वायरल होने के बाद पार्टी के भीतर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस संगठन के अंदर नए विवाद को जन्म दे दिया है और दिग्विजय सिंह के समर्थक खुलकर मैदान में उतर आए हैं।

दिग्विजय सिंह के समर्थकों ने प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीखी नाराजगी जताई है। समर्थकों का कहना है कि राजा साहब हमारे मार्गदर्शक और अभिभावक हैं। उनका अपमान हमारे लिए व्यक्तिगत अपमान के समान है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इसके बाद चाहे कोई कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो, उनके लिए उसका कोई महत्व नहीं रह जाता। समर्थकों के इस रुख ने साफ संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी और ज्यादा बढ़ सकती है।

वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर बीजेपी ने भी कांग्रेस को घेरने का मौका नहीं छोड़ा। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि मध्य प्रदेश कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं का लगातार अपमान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली से आने वाले नेता प्रदेश के अनुभवी और कद्दावर नेताओं को महत्व नहीं दे रहे हैं। रामेश्वर शर्मा ने कहा कि जिस पार्टी को दिग्विजय सिंह ने अपना पूरा जीवन दिया, उसी पार्टी में आज उनके साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है। उन्होंने यह तक कह दिया कि अब दिग्विजय सिंह को सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने पर विचार करना चाहिए।

दरअसल, पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब मीनाक्षी नटराजन के नामांकन से जुड़े मुद्दे पर कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने जेपी धनोपिया को अपनी बात रखने के लिए कहा, लेकिन इसी बीच प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने उन्हें रोकते हुए कहा कि “हम कर लेंगे।” बताया जा रहा है कि इस टिप्पणी के बाद दिग्विजय सिंह ने हाथ जोड़ लिए और बाद में जीतू पटवारी के आग्रह के बावजूद मीडिया से बातचीत करने से इनकार कर दिया।

अब इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और कांग्रेस के भीतर इसे लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और विपक्ष के हमलों के बीच यह मामला आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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