विदिशा। मध्यप्रदेश के Vidisha से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां किसानों की सिंचाई के लिए बनी दशकों पुरानी नहर अब जमीन से गायब हो चुकी है और उसकी जगह कंक्रीट के ढांचे खड़े हो गए हैं, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दौलतपुरा और मदनखेड़ा क्षेत्र में ‘उद्वहन सिंचाई योजना’ के तहत बनाई गई यह नहर कभी किसानों की जिंदगी का सहारा थी, लेकिन आज उसकी जमीन पर भू-माफियाओं के कब्जे के चलते आलीशान कॉलोनियां बस गई हैं और नहर का अस्तित्व लगभग खत्म हो गया है।
अब यह मामला सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सियासी मुद्दा बन गया है, क्योंकि यह वही क्षेत्र है जहां से केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan का संबंध है।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला है, जहां प्रवक्ता आनंद जाट ने आरोप लगाया कि किसानों के हित की बात करने वाले मंत्री के क्षेत्र में ही नहर गायब हो गई और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी, उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा माफियाओं को संरक्षण दे रही है और किसानों की जमीन पर कब्जा कराया जा रहा है।
वहीं अधिकारियों का कहना है कि यह मामला 40 से 50 साल पुराना है और पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं, जैसे-जैसे दस्तावेज मिल रहे हैं उन्हें राजस्व विभाग को भेजा जा रहा है ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।
इधर राजस्व विभाग ने भी इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है और तहसीलदार निधि लोधी के अनुसार अब तक 11 लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिन पर नहर की जमीन पर कब्जा करने का आरोप है और जल्द ही कब्जा हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किसानों की यह नहर फिर से मुक्त हो पाएगी या यह मामला भी हर बार की तरह सिर्फ सुर्खियों तक ही सीमित रह जाएगा।

