नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में सरकारी मूंग खरीदी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। करीब 28 करोड़ रुपये के कथित मूंग-मिट्टी घोटाले के सामने आने के 15 दिन बाद भी मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जिन वेयरहाउसों पर फर्जीवाड़े के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई, उन्हीं केंद्रों पर दोबारा मूंग खरीदी शुरू होने से किसानों में नाराजगी है।
माखननगर के कनकधारा वेयरहाउस में जांच के दौरान बड़ी मात्रा में अमानक मूंग और मिट्टी की मिलावट का मामला सामने आया था। जांच में करीब 31 हजार 298 क्विंटल अमानक मूंग मिलने की बात सामने आई, जिसकी कीमत करीब 28 करोड़ 14 लाख रुपये बताई गई।
मामले में वेयरहाउस संचालक तारेश पुरोहित, तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्याम होसले और जिला प्रबंधक वासुदेव दावंडे के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। लेकिन इस कार्रवाई के बाद भी मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इसी बीच कनकधारा के अलावा चेतन वेयरहाउस फुरतला और राधा कृष्ण वेयरहाउस काजलखेड़ी को लेकर भी विवाद सामने आया था। इन केंद्रों से जुड़े समिति प्रबंधकों और सर्वेयरों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। किसानों को उम्मीद थी कि ऐसे विवादित केंद्रों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा, लेकिन कुछ समय बाद इन्हीं केंद्रों पर फिर से खरीदी शुरू कर दी गई।
जब दागी वेयरहाउसों पर दोबारा खरीदी शुरू होने को लेकर सवाल उठे तो जिला विपणन अधिकारी अनिल जैन ने गोदामों की कमी का हवाला दिया। उनका कहना था कि धान और गेहूं से दूसरे गोदाम भरे हुए हैं, इसलिए फिलहाल इन्हीं केंद्रों पर खरीदी करनी पड़ रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस वेयरहाउस से करोड़ों रुपये की कथित मिलावट का मामला सामने आया, वहां दोबारा सरकारी खरीदी शुरू होने के बाद किसानों की उपज की गुणवत्ता और निष्पक्ष तुलाई की गारंटी कौन देगा।
उधर खरीदी केंद्रों के बाहर किसान अपनी फसल बेचने के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं। कई किसान कई-कई दिनों से अपनी उपज की तुलाई का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि उन्हें टोकन तक नहीं मिल रहे और बाद में आने वाले किसानों की ट्रॉलियों की पहले तुलाई की जा रही है।
किसान अरविंद साहू का आरोप है कि वह अपनी मूंग की फसल लेकर श्री राधा कृष्ण वेयरहाउस पहुंचे थे, लेकिन लगातार सात दिनों तक लाइन में खड़े रहने के बावजूद उनकी फसल की तुलाई नहीं हुई। आखिरकार परेशान होकर उन्हें अपनी ट्रॉली लेकर दूसरी जगह जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
वहीं किसान नीलेश चौधरी का कहना है कि उन्हें खरीदी केंद्र पर आए करीब 12 दिन हो चुके हैं और उनका नंबर निकलने के बावजूद अब तक उनकी मूंग की तुलाई नहीं की गई।
ऐसे में किसानों का सवाल है कि अगर सरकारी खरीदी में इतनी बड़ी रकम का कथित घोटाला सामने आने के बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो आखिर जिम्मेदारी किसकी है। क्या कार्रवाई सिर्फ एफआईआर और कागजों तक सीमित रहेगी, या फिर घोटाले के जिम्मेदार लोगों पर वास्तविक कार्रवाई होगी और किसानों को निष्पक्ष खरीदी की व्यवस्था मिलेगी।

