जबलपुर। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए Central Bureau of Investigation, Indian Nursing Council और Madhya Pradesh Nursing Council से अगली सुनवाई से पहले विस्तृत हलफनामा और प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा है कि जांच एजेंसियां यह बताएं कि अब तक किन-किन लोगों और संस्थानों की संलिप्तता सामने आई है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है, साथ ही उन अधिकारियों की भी जानकारी मांगी गई है जिन्होंने मानकों को नजरअंदाज कर फर्जी या अपात्र कॉलेजों को मान्यता दी।
दरअसल यह मामला लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें 2020-21 के दौरान खुले सैकड़ों नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद जांच में बड़ा खुलासा हुआ कि करीब 800 में से लगभग 600 कॉलेज मानकों पर खरे नहीं उतरे।
जांच में सामने आया कि कई संस्थानों में भवन, लैब, लाइब्रेरी, अनुभवी स्टाफ और अस्पताल जैसी जरूरी सुविधाएं तक नहीं थीं, वहीं कई कॉलेज सिर्फ कागजों पर चल रहे थे और एक ही शिक्षक या प्रिंसिपल कई-कई कॉलेजों में एक साथ दर्ज पाए गए।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि जो कॉलेज जांच में अपात्र पाए गए, उनके छात्रों को दूसरे संस्थानों में शिफ्ट करने के बजाय उन्हीं कॉलेजों में परीक्षाएं कराई जा रही हैं, जिससे छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वहीं नर्सिंग काउंसिल ने परीक्षाएं और परिणाम घोषित करने की अनुमति मांगी है, लेकिन हाईकोर्ट ने फिलहाल दोनों पक्षों के आवेदन लंबित रखते हुए साफ कर दिया है कि शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 मई को होगी, जहां यह साफ हो सकेगा कि इस बड़े घोटाले में जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।

