भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों का इंतजार कर रहे लाखों युवाओं के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान यह खुलासा हुआ कि सामान्य प्रशासन विभाग के पास फिलहाल यह जानकारी ही नहीं है कि प्रदेश में कुल कितने सरकारी पद खाली पड़े हैं।
दरअसल, कांग्रेस विधायक सेना पटेल ने सरकार से प्रदेश के विभिन्न विभागों में रिक्त पदों, भर्ती प्रक्रियाओं और अनुकंपा नियुक्तियों को लेकर सवाल पूछा था। इसके जवाब में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से लिखित रूप में कहा गया कि संबंधित जानकारी एकत्रित की जा रही है।
विधायक सेना पटेल ने सरकार से पूछा था कि प्रदेश के सभी विभागों और जिलों में कितने पद खाली हैं, विभागवार और आरक्षणवार उनकी स्थिति क्या है, कितने पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है और भर्ती में देरी की वजह क्या है। इसके अलावा उन्होंने यह भी जानना चाहा कि अनुकंपा नियुक्ति के कितने मामले लंबित हैं और उन्हें कब तक पूरा किया जाएगा।
लेकिन इन सभी सवालों के जवाब में सरकार की ओर से सिर्फ एक ही बात कही गई—“जानकारी एकत्रित की जा रही है।”
सरकार के इस जवाब के बाद विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि जब सामान्य प्रशासन विभाग के पास ही रिक्त पदों का समेकित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, तो फिर रोजगार और भर्ती से जुड़े फैसले किस आधार पर लिए जा रहे हैं।
विपक्ष ने इसे युवाओं के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि प्रदेश में लाखों युवा सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन सरकार के पास यह तक जानकारी नहीं है कि कितनी सीटें खाली हैं।
अब विधानसभा में सामने आए इस जवाब ने प्रदेश में रोजगार और भर्ती व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मध्य प्रदेश में कितने सरकारी पद खाली हैं, और युवाओं को इन पदों पर भर्ती का इंतजार कब तक करना होगा?

