भोपाल। मध्य प्रदेश में एक प्रशासनिक तबादले ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। शिवपुरी के चर्चित थार कांड में सख्त कार्रवाई के लिए सुर्खियों में आए आईपीएस अधिकारी आयुष जाखड़ का तबादला कर उन्हें भोपाल में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यानी एएसपी के पद पर भेज दिया गया है। इस फैसले के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवालों की बौछार शुरू कर दी है, जबकि बीजेपी इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता रही है।
पूरा मामला शिवपुरी के उस चर्चित विवाद से जुड़ा है, जिसमें बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी के बेटे पर गुंडागर्दी और गोबर फेंकने जैसे आरोप लगे थे। उस समय तत्कालीन पुलिस अधिकारी आयुष जाखड़ ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कानूनी कार्रवाई की थी। कार्रवाई के बाद विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने सार्वजनिक रूप से अधिकारी के खिलाफ तीखी टिप्पणियां की थीं, जिससे यह मामला काफी चर्चा में आ गया था।
अब जब आयुष जाखड़ का तबादला भोपाल कर दिया गया है, तो कांग्रेस ने इसे लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को दबाव में हटाया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे प्रशासनिक अधिकारियों का मनोबल प्रभावित होता है और कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।
पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने इस मुद्दे पर सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि प्रदेश में अराजकता का माहौल है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों पर आरोप लगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय अधिकारियों को ही हटाया जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि ऐसे फैसलों से यह संदेश जाता है कि दबाव के आगे प्रशासन को झुकना पड़ता है।
वहीं दूसरी ओर बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी होना था, वह हो चुका है और कांग्रेस बिना वजह राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। विधायक ने कहा कि कांग्रेस का काम केवल बयान देना है और वह हर विषय पर राजनीति करने से बाज नहीं आती।
आयुष जाखड़ के तबादले के बाद अब यह मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। सत्ता और विपक्ष दोनों अपने-अपने तर्कों के साथ मैदान में उतर चुके हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है और प्रदेश की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बना रह सकता है।

