इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में 9 से 13 जून 2026 तक आयोजित ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने प्रसिद्ध ग्रामीण हाट बाजार का भ्रमण किया। यहां मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों के कृषि उत्पाद, पारंपरिक हस्तशिल्प, प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पाद और ‘एक जिला, एक उत्पाद’ यानी ओडीओपी के तहत विकसित वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया। विदेशी मेहमानों ने हर स्टॉल पर रुककर उत्पादों को करीब से देखा, उत्पादकों से बातचीत की और कई वस्तुओं की खरीदारी भी की। इस दौरान मध्यप्रदेश का कृषि और ग्रामीण विकास मॉडल दुनिया के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा।
ग्रामीण हाट में विदेशी प्रतिनिधियों का स्वागत मालवा की पारंपरिक संस्कृति के अनुरूप किया गया। अतिथियों को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया, जबकि जनजातीय कलाकारों ने रंगारंग लोक और आदिवासी नृत्यों की प्रस्तुति देकर माहौल को जीवंत बना दिया। इन प्रस्तुतियों से प्रभावित होकर कई विदेशी मेहमान खुद भी कलाकारों के साथ थिरकते नजर आए और भारतीय संस्कृति के रंग में रंग गए।
रीवा जिले के जीआई टैग प्राप्त सुंदरजा आम ने विदेशी प्रतिनिधियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। मेहमानों ने विभिन्न प्रजातियों के आमों का स्वाद चखा और उनकी मिठास, सुगंध और गुणवत्ता की खुलकर प्रशंसा की। वहीं, बालाघाट के जीआई टैग प्राप्त चिन्नौर चावल ने भी अपनी अनूठी पहचान के कारण सभी को प्रभावित किया।
मंडला जिले की प्रसिद्ध मिलेट क्वीन लहरी बाई का स्टॉल विदेशी प्रतिनिधियों के लिए सबसे खास आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने वर्षों की मेहनत से संरक्षित दुर्लभ श्रीअन्न यानी मिलेट की विभिन्न किस्मों का संग्रह प्रस्तुत किया। इन पारंपरिक बीजों को देखकर ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने इसे भारत की समृद्ध कृषि विरासत और पारंपरिक ज्ञान का जीवंत उदाहरण बताया।
ओडीओपी के तहत बुरहानपुर के स्टॉल पर केले से बने विभिन्न उत्पादों ने भी सभी का ध्यान खींचा। यहां केला चिप्स, केला कुकीज़ और केले के रेशों से तैयार वस्त्र प्रदर्शित किए गए। एक ही फसल से इतने विविध उत्पाद तैयार करने की क्षमता को विदेशी मेहमानों ने ग्रामीण उद्यमिता और मूल्य संवर्धन का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
झाबुआ के स्टॉल पर साठी मक्का, दूध मोगर मक्का, देशी उड़द, अरहर और लंबे रेशों वाली कपास की जानकारी दी गई। वहीं, नीमच की औषधीय और मसाला फसलें, नरसिंहपुर के करेली का पारंपरिक गुड़ और छिंदवाड़ा के वन उत्पादों ने भी विदेशी प्रतिनिधियों को प्रभावित किया। हर स्टॉल मध्यप्रदेश की कृषि विविधता और प्राकृतिक खेती की ताकत की अलग-अलग कहानी बयां कर रहा था।
मृगनयनी के स्टॉल पर चंदेरी, महेश्वरी और कोसा वस्त्रों के साथ बाघ प्रिंट और गोंड कला की झलक देखने को मिली। इन कलात्मक उत्पादों ने विदेशी मेहमानों को भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा से परिचित कराया। वहीं, प्राकृतिक सिल्क और हेम्प क्लोदिंग के पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को सतत विकास और ग्रामीण आजीविका का सशक्त माध्यम बताया गया।
ग्रामीण हाट में मेहमानों के लिए पारंपरिक खाटों पर बैठने की व्यवस्था की गई थी, जहां उन्हें स्थानीय कृषि उत्पादों से तैयार पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। प्राकृतिक शहद, ए-2 दुग्ध उत्पाद, हर्बल वस्तुएं और गोबर से बने पर्यावरण अनुकूल उत्पादों ने भी विदेशी प्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया। मेहमानों ने भारतीय ग्रामीण आतिथ्य की खुले दिल से सराहना की और स्थानीय स्वाद का भरपूर आनंद लिया।
भ्रमण के अंत में विदेशी प्रतिनिधियों ने ग्रामीण हाट को मध्यप्रदेश की कृषि समृद्धि, पारंपरिक ज्ञान, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता का उत्कृष्ट मंच बताया। उन्होंने उत्पादकों से सीधे संवाद कर उत्पादन और प्रसंस्करण की बारीकियों को समझा और इस अनुभव को बेहद प्रेरणादायक बताया।
ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के दौरान आयोजित यह ग्रामीण हाट केवल एक प्रदर्शनी बनकर नहीं रह गया, बल्कि उसने दुनिया को मध्यप्रदेश की कृषि विरासत, नवाचार और ग्रामीण विकास की जीवंत तस्वीर दिखाने का काम किया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण बना कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक सोच के समन्वय से ग्रामीण भारत वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।

