अयोध्या. श्रीराम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े संत समाज की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र से जुड़े महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने बड़ा बयान देते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है।
महंत कमल नयन दास ने कहा कि यदि चढ़ावे से जुड़े मामले में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो उसकी पूरी पारदर्शिता के साथ जांच होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जांच प्रक्रिया को लेकर भी लोगों के मन में सवाल खड़े हो रहे हैं। उनके अनुसार, जब जांच करने वालों की निष्पक्षता और ईमानदारी पर ही सवाल उठने लगें, तब लोगों का भरोसा बनाए रखना बड़ी चुनौती बन जाता है।
उन्होंने कहा कि आज का माहौल ऐसा बन गया है, जहां हर कोई एक-दूसरे पर आरोप लगा रहा है। ऐसे में जरूरी है कि सच्चाई सामने आए और तथ्यात्मक आधार पर निर्णय लिया जाए। महंत ने यह भी कहा कि अंततः भगवान सब कुछ देख रहे हैं और न्याय भी वही करेंगे।
अपने बयान में उन्होंने उन लोगों को भी आत्ममंथन करने की सलाह दी, जो लगातार दूसरों पर सवाल उठा रहे हैं। महंत कमल नयन दास ने कहा कि किसी पर आरोप लगाने से पहले व्यक्ति को अपने आचरण और कार्यों का भी मूल्यांकन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के सामने पारदर्शिता सभी के लिए समान रूप से जरूरी है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी रकम को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि चढ़ावे की करोड़ों रुपये की राशि को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा था कि यह मुद्दा केवल आर्थिक अनियमितताओं का नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने मांग की थी कि इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए उचित स्तर पर जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जा सके।
इसके साथ ही उन्होंने मंदिर ट्रस्ट और सरकार की ओर से इस मुद्दे पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आने पर भी सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद आवश्यक है, ताकि लोगों के मन में किसी प्रकार का भ्रम या अविश्वास पैदा न हो।
फिलहाल, चढ़ावे को लेकर उठे इस विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और विभिन्न पक्षों की ओर से अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि संबंधित पक्ष इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देते हैं और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

