अमित शाह ने CM मोहन यादव की थपथपाई पीठ! MP में श्वेत क्रांति 2.0 का आगाज, 50 लाख लीटर दूध कलेक्शन का लक्ष्य; ₹255 करोड़ का डेयरी प्लांट
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में 3 अक्टूबर को आयोजित राज्य स्तरीय गौपालक सम्मेलन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिरकत की। सम्मेलन में प्रदेश के दुग्ध उत्पादन, सहकारी डेयरी व्यवस्था, पशुपालकों की आय और गोवंश संवर्धन को लेकर कई योजनाओं और लक्ष्यों की जानकारी दी गई।
अमित शाह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी टीम द्वारा गौपालकों के लिए किए जा रहे कार्यों की तारीफ की। सम्मेलन में मध्यप्रदेश में दूध संग्रहण को आने वाले वर्षों में बढ़ाकर 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य सामने रखा गया। इसी के साथ प्रदेश में श्वेत क्रांति 2.0 को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
75 हजार डेयरी सहकारी समितियां बनाने का लक्ष्य
अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश के गांवों में 75 हजार नई डेयरी सहकारी समितियां बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही करीब 46 हजार मौजूदा डेयरी समितियों को मजबूत करने की योजना है। उन्होंने कहा कि नई समितियां बनाने के अभियान में मध्यप्रदेश का योगदान महत्वपूर्ण होगा।
शाह ने डेयरी आधारित अर्थव्यवस्था को ग्रामीण विकास और महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण से जोड़ते हुए कहा कि दूध के साथ-साथ गोबर से खाद, बायोगैस और अन्य उत्पाद तैयार करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
MP में 50 लाख लीटर प्रतिदिन दूध कलेक्शन का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन 2 करोड़ लीटर से अधिक दूध का उत्पादन होता है। वर्तमान में दुग्ध समितियों के माध्यम से करीब 12 लाख लीटर दूध प्रतिदिन खरीदा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य दुग्ध समितियों का विस्तार करके दूध संग्रहण को 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन गांवों में अभी दुग्ध समितियां नहीं हैं, वहां नई समितियां बनाई जाएंगी। प्रदेश में संचालित छह दुग्ध संघों की कार्यप्रणाली को मजबूत करने के साथ डेयरी वैल्यू चेन और पारदर्शी नीतियों पर भी जोर दिया जाएगा।
80 लाख से ज्यादा गौपालकों का नेटवर्क
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में 80 लाख से अधिक गौपालकों का परिवार है। सरकार किसानों की आय के स्रोत बढ़ाने के लिए कृषि के साथ गौपालन, दूध उत्पादन, मुर्गी पालन, बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की जरूरत है। उनके अनुसार, मध्यप्रदेश में 6 करोड़ से अधिक पशुधन है और उन्नत नस्लों के माध्यम से दूध उत्पादन की क्षमता को बढ़ाने की संभावनाएं हैं।
उज्जैन में ₹255 करोड़ का डेयरी प्लांट
सम्मेलन में उज्जैन में ₹255 करोड़ की लागत से बनने वाले दूध प्रसंस्करण संयंत्र का वर्चुअल भूमिपूजन किया गया। इसकी शुरुआती क्षमता प्रतिदिन 3 लाख लीटर दूध के प्रसंस्करण की होगी।
इसके अलावा भोपाल में ₹16.5 करोड़ की लागत वाले 40 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का लोकार्पण किया गया। भोपाल में ही ₹12.42 करोड़ की अत्याधुनिक राज्य स्तरीय केंद्रीय प्रयोगशाला और शिवपुरी में ₹6.5 करोड़ की मिनी डेयरी परियोजना के सुदृढ़ीकरण कार्य का भी लोकार्पण किया गया।
सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से दूध के संग्रहण, प्रसंस्करण और गुणवत्ता जांच की व्यवस्था को विस्तार मिलेगा तथा डेयरी क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं।
गोपालकों को ₹12 करोड़ बोनस, ₹15.10 करोड़ लाभांश
सम्मेलन में भोपाल और इंदौर दुग्ध संघों से जुड़े सदस्यों को बोनस वितरित किया गया। कार्यक्रम में दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्यों को कुल ₹15.10 करोड़ का लाभांश वितरित किए जाने की जानकारी दी गई।
वहीं, भोपाल और इंदौर दुग्ध संघों से जुड़े पशुपालकों को करीब ₹12 करोड़ बोनस देने का भी उल्लेख किया गया। पांच गोपालक दीदियों को सम्मानित किया गया और डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए।
50 एकड़ में नस्ल सुधार कार्यक्रम
अमित शाह ने कहा कि प्रदेश में 50 एकड़ भूमि पर गाय और भैंस की नस्ल सुधार से जुड़ा कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसके जरिए उन्नत प्रजनन तकनीकों और पशुपालन की आधुनिक व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने की बात कही गई।
शाह ने अपने संबोधन में कहा कि नई प्रजनन तकनीक के जरिए बछिया पैदा करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ाने और पशुपालकों को बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध कराने से जुड़ा है।
गौशालाओं और पशुपालकों के लिए कई घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में करीब 3,500 गौशालाएं हैं, जहां लगभग 5 लाख गोवंश के संरक्षण की बात कही गई। नगर निगम क्षेत्रों में गौशालाओं को मिलने वाले अनुदान को ₹20 से बढ़ाकर ₹40 प्रति गाय प्रतिदिन करने की जानकारी दी गई।
डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत 25 गायों की इकाई स्थापित करने के लिए ₹40 लाख की परियोजना लागत पर ₹10 लाख अनुदान का प्रावधान बताया गया। वहीं, वृंदावन गांवों में उन्नत नस्ल के पशुओं की प्रतियोगिताएं आयोजित करने और प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान पर आने वाले पशुपालकों को क्रमशः ₹1 लाख, ₹50 हजार और ₹25 हजार पुरस्कार देने की घोषणा की गई।
168 नई गौ-एंबुलेंस की घोषणा
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 406 गौ-एंबुलेंस संचालित हैं। अब 168 नई गौ-एंबुलेंस शुरू करने की घोषणा की गई है। इनका उपयोग गोवंश के उपचार और सेवा के लिए किया जाएगा।
उन्होंने प्रदेश में बड़े स्तर पर पशु मेले आयोजित करने की भी बात कही, ताकि पशुपालकों को उन्नत नस्लों और पशुपालन से जुड़ी तकनीकों की जानकारी मिल सके।
गोबर से बायोगैस और ग्रामीण रोजगार पर जोर
अमित शाह ने डेयरी क्षेत्र को केवल दूध उत्पादन तक सीमित न रखने पर जोर दिया। उन्होंने पशु आहार, चारा प्रबंधन, नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान और गोबर से बायोगैस व अन्य उत्पाद तैयार करने की संभावनाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि गोबर के वैज्ञानिक संग्रह और उपयोग के लिए मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश के गांवों तक ऐसे मॉडल पहुंचाने की योजना का भी उल्लेख किया गया। इससे स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य है।
31 दिसंबर 2029 तक MP को नशामुक्त करने का लक्ष्य
सम्मेलन में अमित शाह ने मध्यप्रदेश को 31 दिसंबर 2029 से पहले नशामुक्त करने का लक्ष्य भी दोहराया। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सभी संभव योजनाएं तैयार की जाएंगी और प्रदेश के युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
नई न्याय संहिता पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी
गोपालक सम्मेलन के साथ अमित शाह ने न्याय संहिता पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने प्रदर्शनी के खंड क्रमांक 1 से 10 तक का अवलोकन किया। यहां नई न्यायिक संहिताओं के प्रावधानों, उनके प्रभाव और आमजन को मिलने वाले लाभों की जानकारी प्रदर्शित की गई।
प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नई न्याय संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े कार्यों को भी प्रदर्शित किया गया। अमित शाह ने ऑनलाइन एफआईआर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, फॉरेंसिक साइंस और अन्य तकनीकी प्रावधानों का उल्लेख करते हुए नई व्यवस्था को आधुनिक बनाने की बात कही।
भोपाल में नगर वन के लिए एमओयू
कार्यक्रम के दौरान मोरवन प्रोजेक्ट के तहत भोपाल में नगर वन विकसित करने के लिए KRIBHCO और मध्यप्रदेश राज्य जैवविविधता बोर्ड के बीच एमओयू हुआ। इसका उद्देश्य भोपाल में हरित क्षेत्र का विस्तार, जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन करना है।
नगर वन के विकास से शहर में हरित आवरण बढ़ाने और नागरिकों के लिए बेहतर प्राकृतिक वातावरण तैयार करने की योजना है।
MP की डेयरी अर्थव्यवस्था को विस्तार देने की तैयारी
भोपाल के इस सम्मेलन में डेयरी सहकारी समितियों के विस्तार से लेकर दूध संग्रहण, आधुनिक प्रसंस्करण संयंत्र, नस्ल सुधार, गौशाला सहायता और गोबर आधारित अर्थव्यवस्था तक कई मुद्दों पर जोर दिया गया।
सरकार ने दूध संग्रहण को 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। अब इस लक्ष्य की दिशा में नई समितियों के गठन, डेयरी अधोसंरचना और पशुपालकों को मिलने वाले लाभों का क्रियान्वयन आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगा।