भागीरथपुरा दूषित पानीकांड में बड़ा खुलासा जल्द! हाईकोर्ट ने 600+ पन्नों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने का दिया आदेश, 36 मौतों का जिक्र
इंदौर। इंदौर के बहुचर्चित भागीरथपुरा दूषित पानीकांड में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है। मामले की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय आयोग की रिपोर्ट अब हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड की जाएगी। रिपोर्ट 600 से अधिक पन्नों की बताई जा रही है और इसमें दिसंबर-जनवरी के दौरान हुई मौतों से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख है।
सोमवार को मामले से जुड़ी सात जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने कोर्ट के सामने रिपोर्ट को ऑनलाइन उपलब्ध कराने की मांग रखी थी, ताकि उसका अध्ययन कर आगे की दलीलें तैयार की जा सकें। कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करते हुए रिपोर्ट को वेबसाइट पर अपलोड करने का आदेश दिया।
रिपोर्ट में 36 मौतों का उल्लेख
भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के मामले में जांच रिपोर्ट में 36 मौतों का उल्लेख होने की बात सामने आई है। हालांकि इस मामले में शुरुआती दौर में मौतों के आंकड़े को लेकर सरकारी स्तर पर अलग-अलग आंकड़े सामने आए थे। बाद में जांच और मुआवजे से जुड़े रिकॉर्ड में संख्या बढ़ती गई।
जांच आयोग को यह पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी कि पानी दूषित होने की वजह क्या थी, प्रदूषण का स्रोत क्या था, दूषित पानी से कितनी मौतें हुईं और प्रथमदृष्टया इसके लिए कौन से अधिकारी या कर्मचारी जिम्मेदार पाए जाते हैं। साथ ही प्रभावित परिवारों के मुआवजे से जुड़े पहलुओं की भी जांच की गई।
अधिकारियों को पहले से जानकारी होने का दावा
रिपोर्ट का अवलोकन कर चुके अधिवक्ताओं के हवाले से सामने आया है कि जांच आयोग ने भागीरथपुरा में पेयजल व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं और दूषित पानी की शिकायतों के पुराने रिकॉर्ड का भी परीक्षण किया है।
नईदुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिवक्ताओं का कहना है कि जांच रिपोर्ट में वर्ष 2018 से अधिकारियों को दूषित पानी की समस्या की जानकारी होने और प्रभावी सुधार नहीं किए जाने का उल्लेख है। रिपोर्ट में नई पेयजल लाइन के टेंडर की प्रक्रिया में करीब 20 महीने की देरी का भी जिक्र होने की बात कही गई है।
पेयजल और ड्रेनेज व्यवस्था पर भी सवाल
जांच में पेयजल और ड्रेनेज लाइन बिछाने की व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की गई। रिपोर्ट के बारे में सामने आई जानकारी के मुताबिक, दोनों लाइनों की व्यवस्था में सामने आई कमियों को भी दूषित पानी की स्थिति से जोड़ा गया है।
आयोग ने पेयजल और ड्रेनेज व्यवस्था के प्रबंधन को लेकर संस्थागत बदलाव की सिफारिश किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि रिपोर्ट अब सार्वजनिक होने के बाद ही इसके निष्कर्षों और सिफारिशों की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
वकीलों के लिए रिपोर्ट का अध्ययन आसान होगा
रिपोर्ट के सार्वजनिक नहीं होने के कारण मामले से जुड़े वकीलों को फिलहाल कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय में जाकर उसका अवलोकन करना पड़ रहा था। इसी को लेकर अधिवक्ता मनीष यादव, रितेश इनाणी और अन्य ने रिपोर्ट को ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए आवेदन दिया था।
सोमवार को सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की पीठ ने रिपोर्ट को हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करने का आदेश दिया। अब अधिवक्ता रिपोर्ट का अध्ययन कर अपनी आगे की दलीलें अदालत के सामने रख सकेंगे। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।
अब सार्वजनिक होगी जवाबदेही से जुड़ी जानकारी
भागीरथपुरा मामले में जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि आयोग ने दूषित पानी की वजह, प्रशासनिक स्तर पर हुई चूक और जिम्मेदारी तय करने को लेकर क्या निष्कर्ष निकाले हैं।
रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने को लेकर बहस का रास्ता भी साफ होगा।