24 बच्चों की मौत के बाद भी जवाबदेही अधूरी? पटवारी ने अधिकारी की बहाली पर उठाए सवाल, पूछा- जिम्मेदार कौन!

24 बच्चों की मौत के बाद भी जवाबदेही अधूरी? पटवारी ने अधिकारी की बहाली पर उठाए सवाल, पूछा- जिम्मेदार कौन!
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कफ सिरप से 24 बच्चों की मौत के मामले को लेकर एक बार फिर सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने विभागीय जांच के बीच तत्कालीन औषधि निरीक्षक गौरव शर्मा की बहाली और दूसरे जिले में पदस्थापना को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। गौरव शर्मा उन अधिकारियों में शामिल थे, जिन्हें अक्टूबर 2025 में Coldrif कफ सिरप मामले के बाद निलंबित किया गया था।
जांच पूरी होने से पहले बहाली क्यों?
पटवारी ने 23 सितंबर 2026 के प्रशासनिक आदेश का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच चल रही थी, तो जांच का अंतिम निष्कर्ष आने से पहले निलंबन समाप्त कर उन्हें बहाल करने और गुना में पदस्थ करने का फैसला क्यों लिया गया। उनका कहना है कि 24 बच्चों की मौत जैसे गंभीर मामले में कार्रवाई और विभागीय जांच की पूरी स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
पटवारी ने यह भी सवाल उठाया कि अगर अधिकारी का जवाब प्रथम दृष्टया संतोषजनक नहीं पाया गया था और विभागीय जांच शुरू की गई थी, तो जांच लंबित रहने के दौरान बहाली का आधार क्या था।
सिर्फ कंपनी और दुकानदारों की जांच काफी है?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मामले में औषधि निगरानी तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जांच केवल कफ सिरप बनाने वाली कंपनी या दवा विक्रेताओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि संदिग्ध दवा नियामक व्यवस्था की निगरानी के बावजूद बाजार तक कैसे पहुंची।
अक्टूबर 2025 में Coldrif मामले के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के ड्रग कंट्रोलर को स्थानांतरित करने के साथ ड्रग इंस्पेक्टर गौरव शर्मा, ड्रग इंस्पेक्टर शरद कुमार जैन और डिप्टी डायरेक्टर शोषित कोस्ता को निलंबित किया था।
Coldrif पर लग चुका था प्रतिबंध
मामले के सामने आने के बाद Coldrif कफ सिरप की बिक्री पर रोक लगाई गई थी और दुकानों में मौजूद स्टॉक जब्त करने के निर्देश भी दिए गए थे। जांच के दौरान सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकोल यानी DEG की मौजूदगी सामने आई थी, जिसे गंभीर विषैला पदार्थ माना जाता है।
बाद की रिपोर्टों में सामने आया कि Coldrif से जुड़ी त्रासदी में मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 24 बच्चों की मौत हुई। फरवरी 2026 की PTI रिपोर्ट में भी सितंबर-अक्टूबर 2025 की घटनाओं से जुड़ी कम से कम 24 बच्चों की मौत का उल्लेख किया गया है।
औषधि निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
पटवारी ने प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप के कथित अवैध कारोबार, फर्जी फर्मों, ड्रग लाइसेंस और दवाओं की अवैध बिक्री की जांच को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बड़े स्तर पर अवैध नेटवर्क सक्रिय था, तो निगरानी तंत्र को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली।
उन्होंने दवा निरीक्षकों के रिक्त पदों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं में संसाधनों की कमी का मुद्दा भी उठाया और सरकार से इस दिशा में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
निलंबन के बाद कार्रवाई कहां पहुंची?
पटवारी ने सरकार से यह बताने की मांग की है कि छिंदवाड़ा कफ सिरप मामले में जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी, उनकी विभागीय जांच अब किस स्थिति में है और अब तक किस स्तर पर जवाबदेही तय हुई है।
उन्होंने सरकार से सात प्रमुख सवालों पर जवाब मांगा है—संदिग्ध दवा बाजार तक कैसे पहुंची, समय पर दवा के नमूने क्यों नहीं लिए गए, विभागीय जांच का अंतिम परिणाम क्या है, जांच लंबित रहने के दौरान अधिकारी की बहाली क्यों हुई, कथित अवैध कफ सिरप नेटवर्क पर निगरानी क्यों नहीं हुई, औषधि निरीक्षकों के रिक्त पद कब भरे जाएंगे और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को आधुनिक संसाधन कब उपलब्ध कराए जाएंगे।
पटवारी ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके लिए यह सिर्फ आंकड़ा नहीं बल्कि एक गंभीर त्रासदी है। उन्होंने सरकार से मामले में पारदर्शी जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

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