‘राहुल गांधी इस्तीफा दें!’ SIR और चुनाव आयोग पर बयानबाजी के बीच CM मोहन यादव का बड़ा हमला, बोले- लोकतंत्र पर भ्रम पैदा कर रहे

‘राहुल गांधी इस्तीफा दें!’ SIR और चुनाव आयोग पर बयानबाजी के बीच CM मोहन यादव का बड़ा हमला, बोले- लोकतंत्र पर भ्रम पैदा कर रहे
भोपाल। भोपाल में चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है। मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर उनसे नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा देने की मांग की।
डॉ. मोहन यादव ने 27 सितंबर को बीजेपी कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि नेता प्रतिपक्ष के पद पर रहते हुए राहुल गांधी की भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को लेकर दिए जा रहे बयानों से जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
SIR को लेकर राहुल गांधी पर CM का हमला
मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस उन राज्यों में SIR की प्रक्रिया को सही मानती है, जहां उसे राजनीतिक लाभ मिला, जबकि बीजेपी के सत्ता में आने या कांग्रेस के चुनाव हारने वाले राज्यों में इसी प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, SIR को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को स्पष्ट किया था कि SIR से संबंधित सभी आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से मंजूर किए गए थे। आयोग ने Form-6 और मतदाता सूची से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी स्पष्टीकरण दिया था।
‘राहुल गांधी को आत्मचिंतन करना चाहिए’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस से अपने राजनीतिक रुख पर आत्मचिंतन करने की बात कही। उन्होंने राहुल गांधी के पुराने बयानों और विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं को लेकर कांग्रेस की आलोचनाओं का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और संसद जैसी संस्थाओं को लेकर राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को अपनी बात मर्यादित तरीके से रखनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी से उनके बयानों को लेकर देश की जनता से माफी मांगने की भी मांग की।
BJP का आरोप- संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर भ्रम पैदा कर रही कांग्रेस
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी SIR को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग पर आरोप लगाकर जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है।
खंडेलवाल ने कहा कि चुनाव आयोग ने SIR की प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है और Form-6 में किसी मनमाने या अवैध बदलाव से इनकार किया है। उन्होंने कांग्रेस से चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।
हालांकि, इस पूरे विवाद में विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग की प्रक्रिया और SIR को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं। 27 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस ने आयोग के हालिया स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए उस पर सवाल उठाए हैं।
राहुल गांधी के इस्तीफे की मांग
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यदि राहुल गांधी को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति है, तो उन्हें नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा देने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी हार के बाद SIR और निर्वाचन आयोग को मुद्दा बनाकर राजनीतिक बहस को आगे बढ़ा रही है।
वहीं, राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के मुद्दों पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। इस बीच विपक्षी दलों ने 30 सितंबर को दिल्ली में बैठक कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आगे की रणनीति पर चर्चा करने का फैसला किया है।
उज्जैन के विकास को लेकर भी बोले CM
इसी दौरान मुख्यमंत्री ने उज्जैन के विकास और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में धार्मिक पर्यटन बढ़ा है और आगामी सिंहस्थ को देखते हुए शहर में बड़े स्तर पर विकास कार्य किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, कई स्थानीय लोग सड़क चौड़ीकरण और दूसरी विकास परियोजनाओं के लिए अपने मकान-दुकानों को पीछे करने में प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने इसे उज्जैन के विकास में जनभागीदारी का उदाहरण बताया।
SIR विवाद के बीच बढ़ी सियासी बयानबाजी
एक तरफ चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मत बताया है, वहीं कांग्रेस समेत विपक्षी दल आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। इसी राजनीतिक टकराव के बीच मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और बीजेपी ने राहुल गांधी के बयानों पर पलटवार करते हुए उनके इस्तीफे की मांग उठाई है। अब यह मुद्दा आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति के साथ मध्यप्रदेश की सियासत में भी चर्चा का केंद्र बना रहने की संभावना है।

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