‘विदेशी ताकतें फंसा रही हैं जाल में!’ पंजाब में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान, बोले- ‘सिख भाइयों के पास गुरुबाणी और अमृतसर का आशीर्वाद, भटकने की जरूरत नहीं’
पंजाब के लुधियाना में आयोजित श्री हनुमंत कथा के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नशे और धर्मांतरण के मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर की। कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने पंजाब में नशे पर रोक लगाने और धर्मांतरण से जुड़े मामलों पर गंभीरता से काम करने की बात कही। लुधियाना में पहली बार आयोजित यह हनुमंत कथा 26 से 30 सितंबर तक चल रही है।
‘पंजाब में नशा पूरी तरह बंद हो और धर्मांतरण रुके’
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि पंजाब की स्थिति को देखकर उन्हें चिंता होती है। उन्होंने कहा कि सरकार, प्रशासन और सामाजिक संगठन अपने स्तर पर काम कर रहे हैं, लेकिन उनके अनुसार दो मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है—पंजाब में नशे पर पूरी तरह रोक और धर्मांतरण की गतिविधियों पर नियंत्रण।
उन्होंने दावा किया कि कुछ विदेशी और अन्य ताकतें लोगों को प्रभावित कर धर्मांतरण की ओर ले जाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे किसी भी प्रभाव में आने से बचने की अपील की।
सिख समाज से बोले- अपनी धार्मिक परंपरा पर भरोसा रखें
सिख समाज का जिक्र करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने गुरु परंपरा और गुरुबाणी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सिख समाज के पास गुरुबाणी की समृद्ध परंपरा, नौवें और दसवें गुरु की विरासत और श्री गुरु गोविंद सिंह जी का आशीर्वाद है।
उन्होंने कहा कि पगड़ी धारण करने वाले और श्री गुरु ग्रंथ साहिब में आस्था रखने वाले सिख भाइयों को किसी के बहकावे में आकर धर्मांतरण के रास्ते पर नहीं जाना चाहिए।
‘आपके पास गुरुबाणी और अमृतसर का आशीर्वाद’
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि सिख समाज के पास गुरुबाणी का ज्ञान और महान गुरु परंपरा मौजूद है। उन्होंने अमृतसर के पवित्र धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि सिख समाज को अपनी परंपरा और आस्था से जुड़े रहना चाहिए।
उन्होंने पंजाब के सिख समाज के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि नशे और धर्मांतरण के खिलाफ उठने वाली आवाज में वे उनके साथ हैं।
लुधियाना में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
लुधियाना के ग्लाडा मैदान में आयोजित हनुमंत कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। दूसरे दिन भी पंडाल में भीड़ देखने को मिली और जगह कम पड़ने के कारण कई श्रद्धालु बाहर से कथा सुनते नजर आए। धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में सनातन को एकजुट करने और देश को मजबूत बनाने का संदेश भी दिया।
पांच दिवसीय इस आयोजन के दौरान कथा के साथ सोमवार को दिव्य दरबार का भी कार्यक्रम रखा गया है