इंदौर के दूषित पानी पर उमंग सिंघार का बड़ा हमला! बोले- ‘अफ्रीका के कस्बों जैसी स्थिति’, सरकार पर रिपोर्ट में हेरफेर का आरोप
इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पानी मामले की न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार और इंदौर नगर निगम पर निशाना साधा है। सिंघार ने शहर में पेयजल व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा में स्थिति को लेकर सही जानकारी नहीं दी और जांच रिपोर्ट को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
हालांकि, न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में घटना को किसी एक व्यक्ति की लापरवाही के बजाय कई स्तरों पर दशकों से चली आ रही व्यवस्थागत चूकों का परिणाम बताया गया है। रिपोर्ट में महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
‘स्वच्छता का अवार्ड मिला, साफ पानी का अधिकार कहां?’
उमंग सिंघार ने इंदौर की स्वच्छता पहचान का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि शहर को स्वच्छता के लिए सम्मान मिलने के बावजूद लोगों को साफ पेयजल उपलब्ध क्यों नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी है। सिंघार ने इंदौर नगर निगम के बजट और शहर की मौजूदा जल व्यवस्था का हवाला देते हुए इसे गंभीर स्थिति बताया और तुलना करते हुए कहा कि शहर की हालत ‘अफ्रीका के छोटे-छोटे कस्बों’ जैसी हो गई है।
जांच रिपोर्ट और विधानसभा में दिए जवाब पर सवाल
सिंघार का आरोप है कि घटना के कई महीने बाद भी शहर के कुछ हिस्सों में दूषित पानी की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम और अन्य जांचों में पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करना चाहती थी और विधानसभा में पेयजल व्यवस्था को लेकर गलत जानकारी दी गई।
हालांकि, न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट अब सार्वजनिक हो चुकी है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 600 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया था।
‘जांच आयोग को जरूरी दस्तावेज नहीं मिले’
सिंघार ने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि दूषित पानी की समस्या जांच में सामने आई, लेकिन परियोजना से जुड़े जरूरी दस्तावेज और ब्लूप्रिंट उपलब्ध नहीं कराए गए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जल टैंक से जुड़े कर्मचारियों और पानी में रसायन मिलाने की प्रक्रिया से जुड़े लोगों से पर्याप्त पूछताछ क्यों नहीं हुई। सिंघार ने मेयर कार्यालय में फाइल लंबे समय तक लंबित रहने और इसके पीछे किसी संभावित लेनदेन की जांच की मांग भी उठाई।
जांच आयोग की रिपोर्ट में भी कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है और इस पहलू पर अलग जांच की जरूरत बताई गई है।
जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पर भी सवाल
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि जांच के बाद भी राजनीतिक जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय नहीं की गई और जिम्मेदारी अधिकारियों तक सीमित कर दी गई।
वहीं, न्यायिक आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भागीरथपुरा त्रासदी किसी एक घटना या एक व्यक्ति की लापरवाही का नतीजा नहीं थी, बल्कि अलग-अलग स्तरों पर लंबे समय से चली आ रही व्यवस्थागत चूकों का परिणाम थी। रिपोर्ट में दो पूर्व वरिष्ठ नगर निगम अधिकारियों को क्लीन चिट भी दी गई है।
प्रदेश की दूसरी घटनाओं का भी किया जिक्र
सिंघार ने इंदौर के साथ बालाघाट और सागर की घटनाओं का भी उल्लेख करते हुए प्रदेश की सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं में सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए और प्रभावित परिवारों को पर्याप्त सहायता मिलनी चाहिए।
भागीरथपुरा मामले में सामने आई न्यायिक रिपोर्ट के बाद अब जलापूर्ति व्यवस्था, सीवर और पेयजल पाइपलाइन के रखरखाव के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। आयोग ने भी भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए व्यवस्थागत सुधार और जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है।