MP में नशे के खिलाफ बड़ा एक्शन! 2706 केस, 3690 आरोपी और 46 हजार किलो मादक पदार्थ जब्त; अब हॉट स्पॉट पर होगी पैनी नजर
मध्यप्रदेश में नशे के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच सरकार ने अब उन इलाकों पर निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है, जहां नशीली दवाओं और मादक पदार्थों की गतिविधियां ज्यादा होने की शिकायतें सामने आती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऐसे हॉट स्पॉट को चिन्हित कर वहां लगातार निगरानी रखने और जिला स्तर पर हर महीने कार्रवाई की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
सरकारी बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 में अगस्त तक एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रदेश में 2706 प्रकरण दर्ज किए गए। इन मामलों में 3690 आरोपियों पर कार्रवाई की गई और करीब 46,313 किलो मादक पदार्थ जब्त किया गया।
हॉट स्पॉट पर लगातार निगरानी के निर्देश
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों से कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल कभी-कभार चलने वाले अभियान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शहरों में नशे के संभावित हॉट स्पॉट को चिन्हित कर वहां नियमित निगरानी रखी जाए।
जिला स्तर पर हर महीने बैठक कर यह समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं कि नशे के खिलाफ की गई कार्रवाई का संबंधित क्षेत्रों में क्या असर हुआ और किन इलाकों में अभी भी विशेष निगरानी की जरूरत है।
स्कूल-कॉलेज के आसपास भी रहेगी नजर
सरकार ने शिक्षण संस्थानों के आसपास नशीले पदार्थों की पहुंच रोकने पर भी जोर दिया है। स्कूल-कॉलेजों की 500 मीटर की परिधि को ड्रग्स फ्री परिसर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इसके साथ ही प्रतिबंधित कफ सिरप की जब्ती, नशामुक्ति केंद्रों को सक्रिय करने और जरूरत के अनुसार पुलिस तथा आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई पर भी जोर दिया गया है।
‘नशामुक्त मित्रों’ की भी ली जाएगी मदद
नशे के खिलाफ अभियान में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘नशामुक्त मित्रों’ का सहयोग लेने की व्यवस्था भी की जा रही है। सरकार का फोकस सिर्फ गिरफ्तारी और जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे की समस्या से प्रभावित लोगों को उपचार और पुनर्वास से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।
नशे से संबंधित सूचना और सहायता के लिए 14446 नशामुक्त हेल्पलाइन की व्यवस्था भी लागू की गई है।
युवाओं को नशे से बचाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को खासतौर पर युवाओं को नशे से दूर रखने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि नशे की रोकथाम के लिए कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता, निगरानी, उपचार और पुनर्वास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना जरूरी है।