‘आशंका’ के भरोसे कोर्ट नहीं आ सकते! MP हाईकोर्ट ने वेटरनरी डॉक्टर्स एसोसिएशन की याचिका की खारिज, कहा- पहले आदेश तो आए
जबलपुर। जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि केवल भविष्य में किसी संभावित कार्रवाई की आशंका के आधार पर याचिका दायर नहीं की जा सकती। कोर्ट ने इसी आधार पर वेटरनरी डॉक्टर्स एसोसिएशन की याचिका खारिज कर दी।
एसोसिएशन ने आशंका जताई थी कि राज्य सरकार उनके सदस्यों को दिए गए प्रमोशन आदेश को रद्द कर सकती है। इसी संभावित कार्रवाई को रोकने के लिए एसोसिएशन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
13 अगस्त के आदेश में इन पदों पर हुआ था प्रमोशन
मामले के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से 13 अगस्त 2026 को प्रमोशन का आदेश जारी किया गया था। इसके तहत संबंधित वेटरनरी डॉक्टरों को डिप्टी डायरेक्टर, पशु प्रजनन परियोजना अधिकारी और सिविल सर्जन जैसे पदों पर पदोन्नति दी गई थी।
बाद में इन प्रमोशन को लेकर आपत्तियां सामने आने की बात कही गई। इसके बाद एसोसिएशन को आशंका हुई कि सरकार प्रमोशन आदेश को वापस ले सकती है।
‘सरकार ने अभी कोई प्रतिकूल आदेश जारी नहीं किया’
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि फिलहाल राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई प्रतिकूल या नकारात्मक आदेश जारी नहीं किया गया है, जिससे याचिकाकर्ताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हों।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इस अनुमान के आधार पर याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती कि भविष्य में सरकार कोई कार्रवाई कर सकती है। यानी किसी संभावित आदेश के आने से पहले ही उसे चुनौती देने के लिए अदालत का रुख नहीं किया जा सकता।
भविष्य में आदेश आया तो चुनौती देने की आजादी
हाईकोर्ट ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में राज्य सरकार की ओर से कोई ऐसा आदेश जारी किया जाता है, जिससे संबंधित अधिकारियों के अधिकार प्रभावित होते हैं, तो वे उस आदेश को कानून के अनुसार चुनौती देने के लिए स्वतंत्र होंगे।
इस तरह फिलहाल प्रमोशन आदेश को संभावित रूप से रद्द किए जाने की आशंका के आधार पर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और याचिका का निराकरण कर दिया।