MP Tourism का नया रिकॉर्ड! 21 करोड़ से ज्यादा पर्यटक पहुंचे मध्यप्रदेश, उज्जैन ने सबको पछाड़ा; विदेशी सैलानियों की भी बढ़ी दिलचस्पी
उज्जैन। मध्यप्रदेश में पर्यटन ने वर्ष 2025 में नया रिकॉर्ड बनाया है। प्रदेश में एक साल के दौरान 21 करोड़ 5 लाख से ज्यादा पर्यटकों का आगमन हुआ। यह संख्या वर्ष 2024 की तुलना में करीब 57 प्रतिशत अधिक बताई गई है। खास बात यह है कि मध्यप्रदेश में घरेलू पर्यटकों के साथ विदेशी सैलानियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।
वर्ष 2025 में 1 लाख 83 हजार से ज्यादा विदेशी पर्यटक मध्यप्रदेश पहुंचे, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 9.10 प्रतिशत अधिक हैं। धार्मिक स्थलों के साथ वन्यजीव, विरासत, ग्रामीण और एडवेंचर पर्यटन भी प्रदेश की पहचान को मजबूत कर रहे हैं।
उज्जैन बना प्रदेश का सबसे बड़ा पर्यटन केंद्र
पर्यटकों की संख्या के मामले में उज्जैन मध्यप्रदेश में सबसे आगे रहा। वर्ष 2025 में यहां 8 करोड़ 40 लाख से ज्यादा पर्यटकों के पहुंचने का आंकड़ा सामने आया है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और महाकाल महालोक पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण रहे।
इसके बाद इंदौर में 2 करोड़ 80 लाख से ज्यादा, चित्रकूट में करीब 1.62 करोड़ और मैहर में करीब 1.61 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ।
दतिया के रतनगढ़ माता मंदिर में करीब एक करोड़, नलखेड़ा के मां बगलामुखी मंदिर में 51.69 लाख और अमरकंटक में 43.17 लाख पर्यटक पहुंचे। ये आंकड़े प्रदेश में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन की बड़ी भूमिका को दर्शाते हैं।
विदेशी पर्यटकों को भा रहे MP के जंगल
मध्यप्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व विदेशी पर्यटकों के लिए भी बड़ा आकर्षण बने हुए हैं। वर्ष 2025 में प्रदेश पहुंचे 1.83 लाख से अधिक विदेशी पर्यटकों में से 93,412 पर्यटक वन्यजीव पर्यटन स्थलों तक पहुंचे।
वन्यजीव पर्यटन में विदेशी पर्यटकों की संख्या में करीब 17.44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बांधवगढ़ में 31,390 और कान्हा में 23,992 विदेशी पर्यटक पहुंचे। वहीं प्रोजेक्ट चीता के बाद कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पहली बार 6,316 विदेशी पर्यटकों के पहुंचने का आंकड़ा सामने आया।
खजुराहो से मांडू तक विरासत पर्यटन का विस्तार
मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों की ओर भी पर्यटकों का रुझान बढ़ा है। वर्ष 2025 में करीब 59 लाख विरासत पर्यटक प्रदेश पहुंचे। भोजपुर, ग्वालियर, मांडू, खजुराहो, सांची, भीमबेटका और ओरछा प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल रहे।
चंदेरी के पास स्थित प्राणपुर को देश का पहला क्राफ्ट हैंडलूम टूरिज्म विलेज विकसित किया गया है। यहां आने वाले पर्यटक बुनकरों को चंदेरी साड़ी और दूसरे हस्तशिल्प तैयार करते हुए देख सकते हैं।
इसके अलावा मध्यप्रदेश के छह गांवों को एस्ट्रो विलेज के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
एडवेंचर टूरिज्म से लेकर होमस्टे तक पर जोर
मध्यप्रदेश में पर्यटन को सिर्फ धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। होमस्टे, हेली पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
स्काई डाइविंग, स्कूबा डाइविंग, कयाकिंग और बर्ड वॉचिंग जैसी गतिविधियां पर्यटकों के लिए आकर्षण बन रही हैं। गांधीसागर, हनुवंतिया, कूनो और चंदेरी में आयोजित होने वाले अलग-अलग फेस्टिवल भी प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं।
पर्यटन बढ़ा तो रोजगार के मौके भी बढ़े
बढ़ते पर्यटक आगमन का असर स्थानीय कारोबार और रोजगार पर भी पड़ रहा है। होटल, होमस्टे, गाइड, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प और खान-पान से जुड़े कारोबारों के लिए नए अवसर बन रहे हैं।
धार्मिक स्थलों से लेकर जंगलों, ऐतिहासिक धरोहरों और ग्रामीण पर्यटन तक बढ़ती गतिविधियों के बीच मध्यप्रदेश देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में अपनी मौजूदगी और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।