‘वोट चोरी नहीं, चोरों को वोट देना बंद किया!’ SIR विवाद पर नरोत्तम मिश्रा का राहुल गांधी पर तंज, बोले- जनता का फैसला सबसे ऊपर
शिवपुरी। मध्यप्रदेश के पूर्व गृहमंत्री और बीजेपी नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा रविवार को शिवपुरी पहुंचे, जहां उन्होंने सोन चिरैया होटल में आयोजित ब्राह्मण समाज के प्रतिभा एवं सम्मान समारोह में हिस्सा लिया और प्रतिभाओं का सम्मान किया। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग, EVM और SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया दी।
नरोत्तम मिश्रा ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि EVM से वोट चोरी नहीं हो रही है। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि कभी हाइड्रोजन बम तो कभी सुतली बम फोड़ने की बात कही जाती है, लेकिन अब जनता उनके दावों को समझ रही है।
‘जनता ने चोरों को वोट देना बंद कर दिया’
नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि देश में वोट चोरी नहीं हो रही है, बल्कि “जनता ने चोरों को वोट देना बंद कर दिया है।” उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि है और चुनाव में हार-जीत के लिए अलग-अलग संस्थाओं और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय जनता के निर्णय को स्वीकार करना चाहिए।
उन्होंने राहुल गांधी से देश की जनता से माफी मांगने की बात भी कही।
SIR को लेकर राहुल गांधी लगातार उठा रहे हैं सवाल
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से राहुल गांधी चुनाव आयोग और मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाए हैं। 24 सितंबर को उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए थे।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को लेकर अपनी प्रक्रिया का बचाव किया है। SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबरों पर भी आयोग की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया था कि अधिकारी किसी मुद्दे पर विचार के दौरान सवाल या टिप्पणी कर सकते हैं।
शिवपुरी में बढ़ी नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक सक्रियता
नरोत्तम मिश्रा का शिवपुरी में ब्राह्मण समाज के कार्यक्रम में शामिल होना और मंच से मौजूदा राजनीतिक मुद्दों पर बयान देना उनकी हालिया सार्वजनिक गतिविधियों का हिस्सा है। 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया से हार के बाद भी वह लगातार राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आते रहे हैं।
अब शिवपुरी जैसे इलाकों में उनकी बढ़ती सहभागिता और राजनीतिक बयानों को लेकर स्थानीय स्तर पर उनकी आगे की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा जरूर हो रही है। हालांकि, इसे किसी नए राजनीतिक कदम या रणनीति के तौर पर देखना फिलहाल अटकल का विषय है।