‘गांधी के नोट दिखते ही ठप्पा!’ गडकरी के RTO तंज से MP में सियासी घमासान, कांग्रेस ने उठाया गांधी का मुद्दा तो BJP ने गोडसे पर किया पलटवार
भोपाल। भोपाल में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की RTO अधिकारियों पर की गई टिप्पणी अब मध्य प्रदेश की सियासत में चर्चा का विषय बन गई है। गडकरी ने बसों की फिटनेस जांच और रजिस्ट्रेशन व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि बहुत से RTO अधिकारी ‘गांधीवादी’ हैं और गांधी के नोट दिखते ही फटाफट ठप्पा मार देते हैं। उनके इस बयान पर मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी हंसते नजर आए।
RTO के कामकाज पर गडकरी का तंज
गडकरी ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि नई सुरक्षा व्यवस्था में बसों की फिटनेस के लिए चेकलिस्ट तैयार की जाएगी और उसे वाहन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिजिकल और वीडियो निरीक्षण के बिना बस का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाना चाहिए।
इसी दौरान उन्होंने RTO अधिकारियों पर तंज कसते हुए ‘गांधीवादी’ शब्द का इस्तेमाल किया और कहा कि गलत बस को मंजूरी देने पर अधिकारी की नौकरी जा सकती है। गडकरी ने यह भी कहा कि 17 RTO सेवाओं को डिजिटल किया जा चुका है, इसलिए लोगों को अनावश्यक रूप से RTO कार्यालय आने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
कांग्रेस ने उठाया महात्मा गांधी का मुद्दा
गडकरी के बयान के बाद कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने इस टिप्पणी को महात्मा गांधी के संदर्भ में आपत्तिजनक बताते हुए गडकरी से माफी की मांग की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश की परिवहन व्यवस्था में भ्रष्टाचार का मुद्दा गंभीर है और इसे महात्मा गांधी की विचारधारा से जोड़ना उचित नहीं है।
कुणाल चौधरी ने अपने राजनीतिक पलटवार में भ्रष्टाचार को ‘गोडसेवादी’ विचारधारा से जोड़ते हुए टिप्पणी की।
BJP ने कांग्रेस पर किया पलटवार
कांग्रेस के बयान के बाद बीजेपी की ओर से भी प्रतिक्रिया आई। बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजगोपाल लोया ने कहा कि प्रदेश सरकार RTO से जुड़े मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।
उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस राजनीति के केंद्र में गोडसे को रखना चाहती है, जबकि बीजेपी महात्मा गांधी को केंद्र में रखना चाहती है। बीजेपी ने कांग्रेस की बयानबाजी को लेकर भी सवाल उठाए।
RTO से शुरू हुआ मुद्दा गांधी बनाम गोडसे तक पहुंचा
दरअसल, पूरा विवाद RTO अधिकारियों की कार्यप्रणाली और कथित भ्रष्टाचार पर गडकरी की टिप्पणी से शुरू हुआ था। लेकिन कांग्रेस की प्रतिक्रिया के बाद इसमें महात्मा गांधी का संदर्भ जुड़ गया और बीजेपी के जवाब के बाद बहस गोडसे तक पहुंच गई।
गडकरी की मूल टिप्पणी का संदर्भ बसों की फिटनेस जांच, गलत बसों को मंजूरी देने और RTO व्यवस्था में पारदर्शिता से जुड़ा था। उन्होंने डिजिटल सेवाओं और निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की बात भी कही।
अब राजनीतिक बयानबाजी के बीच असली सवाल RTO व्यवस्था में पारदर्शिता, बसों की फिटनेस जांच और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गडकरी की टिप्पणी के बाद मध्य प्रदेश में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।