राहुल गांधी के बालाघाट दौरे पर घमासान! पटवारी बोले- ‘कलेक्टर-SP को छोड़ेंगे नहीं’, BJP का पलटवार- ‘धमकाना कांग्रेस की पुरानी कार्यशैली’
भोपाल। राहुल गांधी के बालाघाट दौरे के बाद मध्यप्रदेश की सियासत में कलेक्टर और एसपी की कथित गैरमौजूदगी को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष के दौरे की पूर्व सूचना के बावजूद बालाघाट कलेक्टर और एसपी मौके पर मौजूद नहीं रहे। पटवारी ने इसे प्रशासनिक समन्वय और प्रोटोकॉल से जुड़ा गंभीर मामला बताया।
राहुल गांधी 1 अक्टूबर को बालाघाट के जगला गांव पहुंचे थे और आदिवासी बच्चों की मौत से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए।
पटवारी बोले- जहां जरूरत होगी, शिकायत करेंगे
जीतू पटवारी ने कहा कि राहुल गांधी के दौरे के दौरान जिला प्रशासन के प्रमुख अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी थी। उनका दावा है कि इस संबंध में मुख्य सचिव से भी बातचीत की गई थी, लेकिन इसके बावजूद कलेक्टर और एसपी मौके पर नहीं पहुंचे।
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस इस मामले को विधानसभा सहित दूसरे मंचों पर उठाएगी और जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति तथा केंद्रीय गृह मंत्री तक शिकायत पहुंचाएगी। उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की है।
पटवारी ने अपने बयान में कलेक्टर और एसपी को लेकर कहा कि कांग्रेस उन्हें “छोड़ेगी नहीं” और जहां जरूरत होगी वहां शिकायत करेगी। उन्होंने अधिकारियों को उनके कथित “अपराध” की सजा मिलने की बात भी कही। यह पटवारी का राजनीतिक बयान और चेतावनी है।
BJP का पलटवार- कांग्रेस की पुरानी कार्यशैली
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा की ओर से पलटवार किया गया। भाजपा प्रवक्ता मंजरी जैन ने पटवारी के बयान को लेकर कहा कि प्रशासन को धमकाना कांग्रेस की पुरानी कार्यशैली रही है। भाजपा का कहना है कि राहुल गांधी के बालाघाट दौरे के लिए प्रशासन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं।
भाजपा ने पटवारी से यह भी सवाल किया कि यदि उन्होंने कलेक्टर या एसपी को कोई आवेदन अथवा प्रतिवेदन दिया था, तो उसे सार्वजनिक किया जाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि बिना तथ्यों के आरोप-प्रत्यारोप लगाकर राजनीति की जा रही है।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर पहले से उठ रहे थे सवाल
राहुल गांधी के दौरे से पहले भी सुरक्षा और प्रशासनिक समन्वय को लेकर कांग्रेस तथा प्रशासन के बीच बयानबाजी सामने आई थी। कांग्रेस का कहना था कि दौरे की जानकारी पहले से दी गई थी, जबकि पुलिस-प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी और समन्वय को लेकर सवाल उठाए गए थे।
अब कलेक्टर और एसपी की गैरमौजूदगी का मुद्दा इस राजनीतिक विवाद का नया केंद्र बन गया है। कांग्रेस इसे अधिकारियों की जवाबदेही और प्रोटोकॉल का मामला बता रही है, जबकि भाजपा इसे कांग्रेस की ओर से प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में पेश कर रही है।