“रोड नहीं तो वोट नहीं!” 2500 मतदाताओं ने लिया बड़ा फैसला, जिला पंचायत उपचुनाव के बहिष्कार का ऐलान

“रोड नहीं तो वोट नहीं!” 2500 मतदाताओं ने लिया बड़ा फैसला, जिला पंचायत उपचुनाव के बहिष्कार का ऐलान
रायसेन। रायसेन जिला मुख्यालय से सटी ग्राम पंचायत मऊ पथरई और ग्राम पंचायत सूंड सालेरा के ग्रामीणों ने बदहाल सड़क की समस्या को लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का दावा है कि करीब 2500 से ज्यादा मतदाताओं ने एकजुट होकर जिला पंचायत वार्ड नंबर-3 के उपचुनाव का बहिष्कार करने का फैसला लिया है।
ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है—“जब तक रोड नहीं, तब तक वोट नहीं।” अब इस सामूहिक फैसले ने प्रशासन के सामने सड़क निर्माण का मुद्दा एक बार फिर खड़ा कर दिया है।
60 गांवों को जोड़ती है सड़क, हालत बदहाल
ग्रामीणों के मुताबिक, यह सड़क जिला मुख्यालय को करीब 60 गांवों से जोड़ने वाली मुख्य सड़क है। लंबे समय से मरम्मत और देखरेख नहीं होने के कारण सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं और इसका बड़ा हिस्सा उखड़ चुका है।
ग्रामीणों का दावा है कि वर्ष 2023 में सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीण इसी देरी को लेकर नाराज हैं।
PM-CM से लेकर कलेक्टर तक लगा चुके गुहार
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए उन्होंने कई स्तरों पर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की। तहसीलदार और एसडीएम से लेकर कलेक्टर, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक को पत्र भेजकर सड़क की समस्या से अवगत कराने का दावा ग्रामीणों ने किया है।
ग्रामीणों के अनुसार, हर बार उन्हें सड़क निर्माण का भरोसा मिला, लेकिन जमीन पर अब तक कोई ठोस काम शुरू नहीं हुआ।
ग्रामीणों का दावा- हादसों में जा चुकी 3 लोगों की जान
पूर्व सरपंच झलकन बैरागी ने दावा किया कि बदहाल सड़क के कारण हुए हादसों में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण बुजुर्गों को काफी परेशानी होती है और कई बार वे गिरकर घायल भी हो जाते हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क की खराब हालत का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों को रोजाना खराब रास्ते से गुजरना पड़ता है।
चुनाव बहिष्कार से प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश
ग्रामीण खलीलुल्लाह ने कहा कि लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। इसी वजह से जिला पंचायत वार्ड नंबर-3 के उपचुनाव के बहिष्कार का फैसला लिया गया है।
अब ग्रामीणों के इस सामूहिक ऐलान के बाद नजर प्रशासन के अगले कदम पर है। क्या चुनाव बहिष्कार की घोषणा के बाद सड़क निर्माण का रास्ता साफ होगा या ग्रामीणों का आंदोलन आगे भी जारी रहेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

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