उज्जैन मस्जिद विवाद पर भड़के महंत अनिलानंद! बोले- ‘शहर को तालिबान बनाने की कोशिश’, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई के बीच विवाद और तनाव बढ़ गया है। विरोध के दौरान पथराव और पुलिस द्वारा आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें भी सामने आई हैं। इसी बीच भारतीय साधु संत सन्यासी परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष महंत अनिलानंद महाराज ने घटना को लेकर कड़ा बयान दिया है।
महंत अनिलानंद महाराज ने इस पूरे घटनाक्रम की निंदा करते हुए इसे उज्जैन को ‘तालिबान’ बनाने की कोशिश बताया है। उन्होंने कहा कि सड़क सार्वजनिक उपयोग की संपत्ति है और इसका इस्तेमाल किसी एक व्यक्ति या समुदाय तक सीमित नहीं हो सकता।
‘सड़क किसी व्यक्ति विशेष की नहीं’
महंत अनिलानंद महाराज ने कहा कि विकास और सड़क चौड़ीकरण जैसे सार्वजनिक कार्यों में सभी पक्षों को सहयोग करना चाहिए। उनका कहना है कि यदि सड़क के विस्तार के लिए निर्माण हटाने की जरूरत पड़ती है, तो सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए सहयोग किया जाना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान हिंदू समाज के कई धार्मिक स्थलों को हटाने पर सहमति दी गई, तो फिर दूसरे धार्मिक स्थल के प्रभावित हिस्से को लेकर इतना विरोध क्यों किया जा रहा है।
‘कई नेताओं ने भी हटाए अपने निर्माण’
महंत अनिलानंद ने अपने बयान में कहा कि सार्वजनिक हित और विकास कार्यों के लिए कई बड़े नेताओं ने भी अपने निर्माण हटाए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में कानून और विकास की प्रक्रिया का विरोध करने के बजाय प्रशासनिक प्रक्रिया में सहयोग किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह का हिंसक विरोध उन लोगों के लिए भी परेशानी पैदा करता है जो शांति और कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखना चाहते हैं।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
महंत अनिलानंद महाराज ने प्रशासन से मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने अपने बयान में ‘तालिबानी सोच’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ऐसी प्रवृत्तियों पर प्रशासन को कड़ाई से कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में यह भी कहा कि यदि प्रशासन किसी एक पक्ष के दबाव में काम करता है या दोहरा रवैया अपनाता है, तो भविष्य में हिंदू समाज भी अपने धार्मिक स्थलों को हटाने के मामलों में सहयोग नहीं करेगा।
गौरतलब है कि शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण की जद में है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 9 सितंबर को संबंधित याचिकाएं खारिज करते हुए प्रशासन को प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी। इसके बाद मामले को लेकर विरोध और कानूनी प्रक्रिया दोनों जारी हैं।