सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में धिरौली से गजराबहरा तक प्रस्तावित कोयला रेलवे लाइन परियोजना का विरोध तेज हो गया है। जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की और साफ कहा कि वे धारा-247 के तहत अपनी निजी जमीन देने को तैयार नहीं हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह रेलवे लाइन निजी कंपनियों के कोयला परिवहन के लिए बनाई जा रही है, इसलिए जमीन अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत होनी चाहिए। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और सभी कानूनी अधिकार मिलने चाहिए।
जनसुनवाई में पहुंचे लोगों ने आरोप लगाया कि अधिकांश भूमिधारकों को व्यक्तिगत नोटिस तक नहीं दिए गए। सिर्फ अखबारों में सूचना प्रकाशित कर औपचारिकता पूरी कर ली गई, जो पूरी तरह गलत है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि इलाके के कई परिवार पहले भी विभिन्न परियोजनाओं के कारण अपना घर और जमीन खो चुके हैं। अब उन्हें दूसरी बार विस्थापन का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे परिवारों को विशेष राहत और अतिरिक्त पुनर्वास पैकेज मिलना चाहिए।
इस दौरान पर्यावरण का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। ग्रामीणों ने सवाल किया कि रेलवे लाइन के लिए कितने पेड़ काटे जाएंगे और उनके बदले कितने पौधे लगाए जाएंगे। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जंगलों और पर्यावरण की अनदेखी की गई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।
ग्रामीणों ने यहां तक कह दिया कि जरूरत पड़ी तो क्षेत्र में चिपको आंदोलन भी शुरू किया जाएगा। उनका कहना है कि जंगल, जमीन और पानी उनके जीवन का आधार हैं और इन्हें बचाने के लिए वे हर लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
वहीं, अपर कलेक्टर पीसी त्रिपाठी ने बताया कि जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों के आवेदन और आपत्तियां दर्ज कर ली गई हैं। आगे का फैसला जिला प्रशासन और कलेक्टर स्तर पर लिया जाएगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर क्या निर्णय लेता है, क्योंकि सिंगरौली में इस परियोजना को लेकर लोगों का विरोध लगातार बढ़ता नजर आ रहा है।

