शहडोल। मध्य प्रदेश का शहडोल जिला इन दिनों एक नई पहचान के साथ चर्चा में है। यहां प्रशासन और जनप्रतिनिधित्व के कई अहम पदों पर महिलाओं की मौजूदगी ने इसे नारी सशक्तिकरण की एक अनूठी मिसाल बना दिया है। नई कलेक्टर के रूप में आईएएस अधिकारी मिशा सिंह की पदस्थापना के बाद शहडोल में शीर्ष स्तर पर महिलाओं की भूमिका और भी मजबूत हो गई है।
शहडोल संभाग में कमिश्नर सुरभि गुप्ता और आईजी एन. चैत्रा पहले से अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं। वहीं, जिले की कमान अब कलेक्टर मिशा सिंह के हाथों में है। राजनीतिक क्षेत्र में भी महिलाओं की मजबूत भागीदारी देखने को मिल रही है, जहां शहडोल संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व सांसद हिमाद्रि सिंह कर रही हैं।
इतना ही नहीं, जिले के सोहागपुर, जयसिंहनगर, ब्यौहारी और बुढ़ार जैसे प्रमुख अनुविभागों में भी एसडीएम के पदों पर महिला अधिकारी तैनात हैं। इसके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष, सिविल सर्जन, भाजपा जिलाध्यक्ष और बुढ़ार व धनपुरी नगरपालिकाओं के अध्यक्ष पदों पर भी महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका दिखाई दे रही है।
शहडोल की यह तस्वीर केवल एक संयोग नहीं, बल्कि बदलते भारत की कहानी बयां करती है। प्रशासन से लेकर राजनीति तक महिलाओं की बढ़ती भागीदारी यह संदेश देती है कि नेतृत्व क्षमता किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। जिले के लोगों को उम्मीद है कि महिलाओं के इस नेतृत्व में शहडोल विकास, पारदर्शिता और संवेदनशील प्रशासन की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
आज शहडोल का यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे ‘शहडोल विमेंस लीडरशिप मॉडल’ कह रहे हैं, जो यह साबित करता है कि जब अवसर मिलता है, तो महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट नेतृत्व दे सकती हैं।

