इंदौर। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पास की बहुमूल्य जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इस मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ तक पहुंच गया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, राजस्व विभाग, कलेक्टर उज्जैन, नगर निगम और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि महाकाल मंदिर के समीप स्थित शासकीय भूमि को कथित तौर पर राजस्व रिकॉर्ड में निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया और बाद में उसका एक हिस्सा निजी कंपनी को हस्तांतरित कर दिया गया। यह जनहित याचिका राजेंद्र कुवेल की ओर से दायर की गई है।
याचिका के अनुसार, ग्राम कस्बा उज्जैन के सर्वे नंबर 3664/1, 3666/1, 3690/1/1 और 3691/1 की करीब 1.877 हेक्टेयर भूमि वर्ष 1950 के रिकॉर्ड में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज थी। आरोप है कि समय के साथ बिना सक्षम आदेश के इस जमीन का नामांतरण कर दिया गया।
याचिकाकर्ता का दावा है कि इस भूमि का एक हिस्सा बाद में यूtopia होटल एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम स्थानांतरित किया गया। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस कंपनी के निदेशकों में आलोट से विधायक चिंतामन मालवीय का नाम शामिल है।
सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर जताई गई है कि विवादित भूमि का उपयोग वर्तमान में हरि फाटक पार्किंग के रूप में किया जा रहा है, जहां महाकाल मंदिर आने वाले हजारों श्रद्धालु अपने वाहन खड़े करते हैं। यदि यहां व्यावसायिक निर्माण शुरू होता है, तो आने वाले सिंहस्थ मेले के दौरान यातायात और भीड़ प्रबंधन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
जनहित याचिका में मांग की गई है कि इस भूमि को दोबारा शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए, किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगाई जाए, पार्किंग व्यवस्था को सुरक्षित रखा जाए और कथित नामांतरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय की जाए।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि महाकाल की इस बहुमूल्य भूमि को लेकर सामने आए आरोपों पर सरकार और प्रशासन क्या जवाब देते हैं, और सिंहस्थ से पहले इस विवाद का क्या समाधान निकलता है।

