छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित पुनर्वासित गांवों की जमीनी स्थिति देखने छतरपुर कलेक्टर मृणाल मीना और एसपी रजत सकलेचा मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने करौंदिया, सलैया और मोतीगढ़ की नई बसाहटों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।
करौंदिया में कलेक्टर और एसपी ने घर-घर जाकर लोगों से मुलाकात की। इस दौरान ग्रामीणों ने कच्चे मकानों से पक्के मकानों में शिफ्ट होने पर खुशी जताई। अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि नई बसाहटों में जरूरी सुविधाओं को प्राथमिकता के साथ विकसित किया जाएगा।
समग्र आईडी शिफ्ट कराने की अपील
कलेक्टर ने विस्थापित परिवारों से अपनी समग्र आईडी नई बसाहट में शिफ्ट कराने और बच्चों के नाम उसमें जुड़वाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे परिवारों को शिक्षा, पेंशन और सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी नहीं होगी।
जानकारी के मुताबिक करौंदिया में करीब 200 और मोतीगढ़ में 30 परिवार नई बसाहट में पहुंचकर अपने मकानों का निर्माण करा रहे हैं।
बिजली-पानी और सड़क की समस्याओं पर सख्त निर्देश
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने बिजली, सड़क, नाली और पेयजल से जुड़ी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। कलेक्टर ने संबंधित विभागों को इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
पीएचई विभाग को हैंडपंप लगाने और जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नाली निर्माण का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया। वहीं अस्थायी विद्युत व्यवस्था को एक सप्ताह के भीतर बहाल करने के निर्देश भी दिए गए।
स्कूल और आंगनवाड़ी जैसी सुविधाओं पर फोकस
कलेक्टर ने कहा कि नई बसाहटों में स्कूल, आंगनवाड़ी और सामुदायिक भवन जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। जिन परिवारों को पुनर्वास पैकेज की राशि मिल चुकी है, उनसे जल्द आवास निर्माण शुरू कर नई बसाहट में शिफ्ट होने की अपील भी की गई।
गौरतलब है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी बीते दिनों खजुराहो में समीक्षा बैठक कर चुके हैं। अब प्रशासन प्रभावित और पुनर्वासित गांवों में सुविधाओं को जमीन पर उतारने के लिए लगातार निरीक्षण कर रहा है।

