पीएम मोदी के 12 साल: विरासत से विकास तक, मध्यप्रदेश में बना आस्था, संस्कृति और प्रगति का नया मॉडल

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 12 वर्ष पूरे होने के साथ ही देश में “विरासत से विकास” की सोच को नई पहचान मिली है। इसी दृष्टि को आगे बढ़ाते हुए मध्यप्रदेश भी आज सांस्कृतिक संरक्षण, धार्मिक पर्यटन और विकास के नए मॉडल के रूप में उभर रहा है। केंद्र सरकार के सहयोग और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल से प्रदेश में आस्था, परंपरा और आधुनिक विकास का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।

मध्यप्रदेश अपनी प्राचीन सभ्यता, मंदिरों, आध्यात्मिक धरोहरों और सांस्कृतिक विरासत के लिए पूरे देश में जाना जाता है। बीते वर्षों में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक उत्थान और विरासत संरक्षण के संकल्प को जमीन पर उतारने के लिए लगातार काम कर रही है।

इसी कड़ी में उज्जैन में विश्व की पहली “विक्रमादित्य वैदिक घड़ी” की स्थापना एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विक्रमोत्सव के अवसर पर इस घड़ी का शुभारंभ किया, जिसने भारतीय कालगणना परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। यह घड़ी सिर्फ समय नहीं बताती, बल्कि पंचांग, सूर्योदय, शुभ मुहूर्त और ग्रहों की स्थिति जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी उपलब्ध कराती है। उज्जैन से शुरू हुई यह पहल अब देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों तक पहुंच चुकी है और काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में इसकी स्थापना ने भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पहचान दी है।

प्रदेश में एकात्म धाम परियोजना भी तेजी से आकार ले रही है। आचार्य शंकर की शिक्षाओं और अद्वैत वेदांत दर्शन को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के उद्देश्य से विकसित हो रहे इस प्रोजेक्ट में हजारों करोड़ रुपये की लागत से अद्वैत लोक संग्रहालय और शोध केंद्र बनाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य भारतीय दर्शन, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। सरकार इसे महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित कर रही है और आने वाले वर्षों में यह देश के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में शामिल हो सकता है।

मोहन सरकार प्रदेश की सनातन परंपराओं को भी नए स्वरूप में आगे बढ़ा रही है। राज्य स्थापना दिवस पर सांस्कृतिक उत्सव, गोवर्धन पूजा जैसे कार्यक्रम, महर्षि सांदीपनी के नाम पर शैक्षणिक संस्थानों का विकास और भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही रानी दुर्गावती, अहिल्याबाई होल्कर और जनजातीय नायकों की स्मृतियों को सम्मान देने के लिए विशेष कार्यक्रम और कैबिनेट बैठकों का आयोजन भी किया गया।

धार्मिक पर्यटन के विस्तार का असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। महाकाल लोक, ओंकारेश्वर, उज्जैन, चित्रकूट और अन्य धार्मिक स्थलों पर बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या से स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। आस्था अब केवल धार्मिक विषय नहीं रही, बल्कि यह आर्थिक विकास और स्थानीय रोजगार का मजबूत आधार भी बनती जा रही है।

मां शिप्रा परिक्रमा, गंगा दशहरा और अन्य धार्मिक आयोजनों को जिस तरह जनसमर्थन मिल रहा है, वह प्रदेश में सांस्कृतिक चेतना के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विजन स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश की सनातन विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

यही कारण है कि आज मध्यप्रदेश में “विरासत से विकास” का मंत्र केवल एक नारा नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली हकीकत बनता जा रहा है। आस्था, संस्कृति, पर्यटन और रोजगार के इस मॉडल को अब “नमो-मोहन मॉडल” के रूप में भी देखा जाने लगा है, जो विकसित भारत के सपने को नई गति देने का प्रयास कर रहा है।

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