ईरान पर हुई भीषण सैन्य कार्रवाई के बाद देश की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद इस पद को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। चर्चा थी कि उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, लेकिन ताजा खबरों के मुताबिक यह अहम पद वरिष्ठ धर्मविद अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को सौंपा गया है।
बताया जा रहा है कि अयातुल्ला अराफी को ईरान की अंतरिम नेतृत्व परिषद में फकीह यानी धर्मविद सदस्य के रूप में शामिल किया गया है और उन्होंने अस्थायी तौर पर सर्वोच्च नेता की जिम्मेदारियां संभाल ली हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, वे नए सुप्रीम लीडर के औपचारिक चयन तक देश की कमान संभालेंगे।
इससे पहले यह पद अयातुल्ला अली खामेनेई के पास था, जिन्हें ईरान में बेहद सम्मान दिया जाता था और जिनकी अनुमति के बिना देश में कोई बड़ा फैसला नहीं होता था। अब संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नए सर्वोच्च नेता के चयन तक अंतरिम परिषद देश का नेतृत्व करेगी।
ईरान के संविधान के अनुसार इस अस्थायी नेतृत्व परिषद में तीन प्रमुख सदस्य शामिल होते हैं, राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन, मुख्य न्यायाधीश गुलाम होसैनी मोहसेनी एजेइ और गार्जियन काउंसिल से एक धर्मगुरु, जिसके रूप में अयातुल्ला अराफी को शामिल किया गया है। यह परिषद मिलकर देश का संचालन करेगी जब तक कि नया सुप्रीम लीडर आधिकारिक तौर पर नियुक्त नहीं हो जाता।
गौरतलब है कि 86 वर्षीय अली खामेनेई की मौत अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में हुई, जिसमें कई सैन्य ठिकानों और सरकारी इमारतों को निशाना बनाया गया था। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सबसे पहले उनकी मौत की घोषणा की थी, जिसके बाद ईरान ने भी इसकी पुष्टि की।
फिलहाल ईरान एक बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है, जहां एक ओर बाहरी हमलों का दबाव है तो दूसरी ओर आंतरिक राजनीतिक स्थिति तेजी से बदल रही है। ऐसे समय में नए नेतृत्व की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

