भोजशाला में संतों का बड़ा बयान! 750 साल के संघर्ष का जिक्र, बोले- यह हिंदू समाज के पूजा अधिकार की ऐतिहासिक जीत, अब मथुरा-काशी की ओर बढ़ेगी लड़ाई?

धार। धार स्थित भोजशाला में उस समय धार्मिक और सामाजिक माहौल खासा चर्चा में आ गया, जब अखिल भारतीय संत समिति के संयुक्त महासचिव राधे-राधे बाबा और महामंडलेश्वर नरसिंहदास महाराज के नेतृत्व में संतों का एक प्रतिनिधिमंडल मां वाग्देवी के दर्शन करने पहुंचा। संतों ने भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना की, हनुमान चालीसा का पाठ किया और मां वाग्देवी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस दौरान संत समाज ने भोजशाला को लेकर आए न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए इसे हिंदू समाज की आस्था, श्रद्धा और पूजा के अधिकार की बड़ी जीत बताया। संतों का कहना था कि यह केवल किसी एक धार्मिक स्थल का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा विषय है।

मीडिया से बातचीत करते हुए राधे-राधे बाबा ने कहा कि भोजशाला को लेकर मिली सफलता लगभग 750 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद प्राप्त हुई एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्णय ने करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान किया है और इससे पूरे समाज में खुशी और संतोष का वातावरण बना है।

संतों ने भोजशाला को भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक बताते हुए कहा कि यह केवल एक मंदिर या धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि देश की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की पहचान है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थलों का संरक्षण और सम्मान देश की सांस्कृतिक चेतना के लिए आवश्यक है।

वहीं राधे-राधे बाबा के एक बयान ने भी खूब चर्चा बटोरी। उन्होंने कहा कि भोजशाला तो अभी एक झांकी है, आगे मथुरा और काशी जैसे विषय भी शेष हैं। उनके इस बयान के बाद वहां मौजूद श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला और यह बयान राजनीतिक व सामाजिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया।

भोजशाला में संतों की इस यात्रा और उनके बयानों के बाद एक बार फिर यह ऐतिहासिक स्थल सुर्खियों में आ गया है, जहां आस्था, इतिहास और न्यायालय के फैसले को लेकर नई बहस छिड़ती दिखाई दे रही है।

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