भोपाल। मध्यप्रदेश के आदिवासी जिला बड़वानी के नागलवाड़ी में आयोजित किसान कैबिनेट में कई अहम निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि किसान कल्याण से जुड़े छह प्रमुख विभागों की 16 योजनाओं पर महत्वपूर्ण फैसले किए गए हैं और कुल 27 हजार 746 करोड़ रुपए किसान हित में खर्च किए जाएंगे।
इन फैसलों में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता और नर्मदा घाटी विकास विभाग के प्रस्ताव शामिल हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में 3 हजार 502 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जाएगी, जबकि उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण की तीन योजनाओं पर 4 हजार 263 करोड़ रुपए से ज्यादा का प्रावधान किया गया है। पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग की चार योजनाओं के लिए 9 हजार 508 करोड़ रुपए, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग की दो योजनाओं के लिए 218 करोड़ से अधिक और सहकारिता विभाग की चार योजनाओं के लिए 8 हजार 186 करोड़ रुपए खर्च होंगे। वहीं नर्मदा घाटी विकास विभाग के माध्यम से 2 हजार 67 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है।
नर्मदा घाटी विभाग के अंतर्गत बरला उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना को मंजूरी दी गई है, जिससे इस तहसील के 33 गांवों की लगभग 15 हजार 500 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 861 करोड़ रुपए है।
सरकार ने बड़वानी को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की भी बात कही है। साथ ही खेतिया कृषि उपज मंडी को आदर्श उपज मंडी बनाया जाएगा, जिस पर लगभग 10 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश प्राकृतिक खेती के लिए देशभर में पहचान बना चुका है और इसी दिशा में बड़वानी जिले के 25 किसानों को प्राकृतिक खेती का मास्टर ट्रेनर बनाने का निर्णय लिया गया है। इन किसानों को प्रदेश के बाहर प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा, ताकि वे लौटकर अन्य किसानों को प्रशिक्षित कर सकें और प्राकृतिक खेती को और मजबूती मिल सके। सरकार का कहना है कि किसानों को समृद्ध बनाकर ही राज्य को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाया जाएगा।

