भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। इसी बीच कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को लेकर पूरी रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी इस मौके को केवल नामांकन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे अपनी एकजुटता और ताकत के प्रदर्शन के रूप में पेश करने की तैयारी में है। यही वजह है कि कांग्रेस हाईकमान से लेकर प्रदेश नेतृत्व तक सभी नेता इस कार्यक्रम को सफल बनाने में जुट गए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस ने नामांकन प्रक्रिया को एक बड़े राजनीतिक आयोजन का रूप देने का फैसला किया है। सभी कांग्रेस विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को सुबह साढ़े दस बजे भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। यहां सभी नेता एक मंच पर एकत्र होंगे और इसके बाद सामूहिक रूप से विधानसभा के लिए रवाना होंगे। सुबह 11 बजे मीनाक्षी नटराजन अपने समर्थक विधायकों और शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करेंगी।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस पूरे कार्यक्रम का उद्देश्य यह संदेश देना है कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और किसी भी राजनीतिक दबाव या अटकलों से प्रभावित नहीं होने वाली। हाल के दिनों में राज्यसभा चुनाव को लेकर जिस तरह की चर्चाएं और राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं, उसके बीच कांग्रेस इस शक्ति प्रदर्शन के जरिए अपने विधायकों की एकजुटता दिखाना चाहती है। यही कारण है कि सभी विधायकों को कार्यक्रम में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मीनाक्षी नटराजन का राजनीतिक सफर भी काफी लंबा और अनुभवों से भरा रहा है। उन्होंने छात्र राजनीति से अपने करियर की शुरुआत की थी और एनएसयूआई से लेकर भारतीय युवा कांग्रेस तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह एनएसयूआई की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं और मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस का नेतृत्व भी संभाल चुकी हैं। संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और लंबे अनुभव ने उन्हें कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल किया है।
मीनाक्षी नटराजन को कांग्रेस नेता राहुल गांधी का करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है। पार्टी संगठन में उनकी मजबूत पकड़ के चलते उन्हें कई राष्ट्रीय जिम्मेदारियां भी दी गईं। फरवरी 2025 में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उन्हें तेलंगाना के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का प्रभारी नियुक्त किया था। इससे पहले वह वर्ष 2009 में मंदसौर लोकसभा सीट से सांसद भी चुनी जा चुकी हैं। हालांकि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
हालांकि उनके नाम की घोषणा के साथ ही मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर कुछ असंतोष की आवाजें भी उठी थीं। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना था कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को दोबारा राज्यसभा भेजा जाता तो यह सीट और अधिक सुरक्षित मानी जाती। बावजूद इसके कांग्रेस नेतृत्व ने मीनाक्षी नटराजन पर भरोसा जताते हुए उन्हें उम्मीदवार बनाया है।
उधर राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त हलचल बनी हुई है। बीजेपी ने भी अपने सभी विधायकों को भोपाल में रुकने के निर्देश दिए हैं। कैबिनेट मंत्री और मुख्य सचेतक कैलाश विजयवर्गीय के बयानों के बाद यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा तीसरी सीट को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। दूसरी तरफ कांग्रेस भी अपने खेमे को पूरी तरह एकजुट रखने में जुटी हुई है।
अगर विधानसभा के आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्यसभा की तीन सीटों में से दो सीटें बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना लगभग तय माना जा रहा है। विधानसभा की 230 सीटों में बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 64 विधायक मौजूद हैं। भारत आदिवासी पार्टी के पास एक विधायक है और एक सीट फिलहाल रिक्त है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है। ऐसे में बीजेपी दो सीटें आसानी से जीत सकती है, जबकि कांग्रेस के पास भी अपनी एक सीट सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है। लेकिन तीसरी सीट को लेकर जारी सियासी गतिविधियों ने पूरे चुनाव को दिलचस्प बना दिया है और अब सभी की नजरें नामांकन से लेकर मतदान तक की हर राजनीतिक चाल पर टिकी हुई हैं।

