भारत में इजरायल के राजदूत Reuven Azar ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका मिलकर ईरान के आसमान पर नियंत्रण बनाए हुए हैं और अब तक 2,500 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है। उन्होंने संकेत दिए कि मौजूदा हालात ईरान में बड़े राजनीतिक बदलाव की तरफ भी इशारा कर सकते हैं।
राजदूत के मुताबिक इस समय इजरायल लगातार ईरान से आने वाली मिसाइलों और ड्रोन हमलों को नाकाम कर रहा है। उत्तर दिशा से Hezbollah की ओर से हुए हमलों को भी रोका गया है। हालांकि एक बैलिस्टिक मिसाइल के सीधे हमले में बेत शेमेंश शहर में नौ नागरिकों की मौत और करीब 50 लोग घायल हुए। इसके बावजूद उनका कहना है कि इजरायल ने अपने देश की ओर आने वाली ज्यादातर मिसाइलों को निष्क्रिय कर दिया है और जवाबी कार्रवाई तेज है।
ईरान में संभावित शासन परिवर्तन को लेकर भी उन्होंने उम्मीद जताई। उनका कहना है कि फैसला ईरानी जनता के हाथ में है। हाल के प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में लोगों ने बदलाव की मांग की थी, लेकिन ईरानी शासन की सख्ती भी सामने आई। इजरायल की कार्रवाई सिर्फ हमलों को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि Islamic Revolutionary Guard Corps के कई अहम ठिकानों को भी निशाना बनाया जा रहा है ताकि भविष्य में ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर की जा सके।
उन्होंने कहा कि मकसद ऐसी स्थिति बनाना है, जिसमें ईरान इजरायल, क्षेत्र के अन्य देशों या अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने की स्थिति में न रहे। उनका साफ संकेत था कि मौजूदा नेतृत्व को भी यह समझना होगा कि अगर नीतियां नहीं बदली गईं तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
भारत का जिक्र करते हुए राजदूत ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया इजरायल यात्रा की सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ रणनीतिक हितों पर नहीं, बल्कि साझा मूल्यों और विश्वास पर टिके हैं। इजरायल भारत को एक भरोसेमंद साझेदार मानता है और दोनों देश अपने-अपने क्षेत्रों में शांति, स्थिरता और समृद्धि चाहते हैं।
जमीनी कार्रवाई को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल इजरायल की रणनीति हवाई हमलों पर केंद्रित है। जरूरत पड़ने पर सीमित स्तर पर विशेष कार्रवाई हो सकती है, लेकिन बड़े पैमाने पर जमीनी सेना भेजने की कोई जानकारी उनके पास नहीं है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच यह बयान साफ संकेत देता है कि आने वाले दिन बेहद अहम होने वाले हैं, जहां कूटनीति, सैन्य रणनीति और वैश्विक राजनीति तीनों एक साथ निर्णायक मोड़ पर खड़ी हैं।

