नीमच। मध्य प्रदेश के नीमच जिले के जावद में हर साल रंग पंचमी के दिन एक अनोखा दरबार लगता है, जिसे कुंवारों के देवता बिल्लम बावजी का दरबार कहा जाता है। यह खास दरबार रंग पंचमी से शुरू होकर रंग तेरस तक करीब नौ दिनों तक चलता है। इस दौरान हजारों अविवाहित युवक-युवतियां और उनके परिजन यहां पहुंचकर विवाह की मनोकामना लेकर अर्जी लगाते हैं और बिल्लम बावजी के दर्शन करते हैं।
करीब 30 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के अनुसार बिल्लम बावजी की प्रतिमा को गणेश मंदिर की कुई से निकालकर जावद के पुरानी धान मंडी क्षेत्र में स्थापित किया जाता है। इसके बाद यहां नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना और मन्नतों का दौर चलता है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु यहां माथा टेककर अपने लिए योग्य जीवनसाथी मिलने की प्रार्थना करते हैं।
यहां एक खास परंपरा भी निभाई जाती है। मान्यता है कि बिल्लम बावजी के दरबार में पान और नारियल अर्पित कर अर्जी लगाने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर हो जाती हैं और जल्द ही शादी के योग बनते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस युवक या युवती के लिए अर्जी लगाई जाती है, उसे चढ़ाया हुआ पान खाना होता है और इसके बाद जल्द ही विवाह का रिश्ता तय होने की बात कही जाती है। कई श्रद्धालु ऐसे उदाहरण भी बताते हैं, जिनमें बिल्लम बावजी की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूरी हुई हैं।
बताया जाता है कि करीब 30 साल पहले गणेश मंदिर की कुई की सफाई के दौरान यह प्रतिमा निकली थी। इसके बाद इसे वहीं कुई के थारे पर स्थापित कर दिया गया और धीरे-धीरे इसकी ख्याति कुंवारों के देवता के रूप में फैलने लगी। आज यह अनोखा दरबार लोगों की गहरी आस्था का केंद्र बन चुका है, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों युवक-युवतियां हर साल अपने जीवनसाथी की कामना लेकर पहुंचते हैं और बावजी के दरबार में माथा टेकते हैं।

