शहडोल। मध्यप्रदेश के Shahdol जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जो प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री Rajendra Shukla के प्रभार वाला जिला है।
ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र के अंतिम छोर पर स्थित निपनिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक तरफ चमचमाती नई बिल्डिंग खड़ी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि यहां एक भी डॉक्टर पदस्थ नहीं है और पूरा अस्पताल सिर्फ दो नर्सों के भरोसे संचालित हो रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि यहां आने वाले मरीजों, खासकर गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमार लोगों को इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें भारी परेशानी और जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
नियमों के अनुसार इस स्वास्थ्य केंद्र में कम से कम पांच डॉक्टरों की नियुक्ति होना जरूरी है, लेकिन वर्तमान में एक भी डॉक्टर उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण नर्सों को ही मजबूरी में डॉक्टर की भूमिका निभानी पड़ रही है।
आदिवासी बाहुल्य इस इलाके में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लोगों के लिए बड़ी चिंता बन गई है, जहां ग्रामीणों का कहना है कि सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है और यह अस्पताल उन दावों की पोल खोल रहा है।
डॉक्टरों की कमी के कारण न सिर्फ इलाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि मरीजों की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है, जिससे स्थानीय लोग और अस्पताल कर्मचारी दोनों ही परेशान हैं।
इस मामले पर जिले के सीएमएचओ डॉ. राजेश मिश्रा ने सफाई देते हुए कहा कि पहले यहां डॉक्टर पदस्थ थे, लेकिन उनका बॉन्ड पीरियड खत्म हो गया और कई डॉक्टर पीजी करने चले गए, जिसके कारण यह स्थिति बनी है।
उन्होंने बताया कि नए डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है और जल्द ही इस समस्या का समाधान करने की कोशिश की जाएगी, लेकिन फिलहाल मरीजों को इस बदहाल व्यवस्था का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

