भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal से एक बड़ा बैंक घोटाला सामने आया है, जहां आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी Economic Offences Wing ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए Canara Bank से 33 लाख रुपये का लोन लेने के मामले में 6 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने जिस संपत्ति को गिरवी दिखाकर लोन लिया, वह पहले से ही बैंक में बंधक थी और साल 2021 में नीलाम भी हो चुकी थी, इसके बावजूद उसी संपत्ति को दोबारा गिरवी दिखाकर बैंक को चूना लगाया गया।
बताया जा रहा है कि यह लोन 2019 में ही NPA घोषित हो चुका था, लेकिन इसके बाद भी कूटरचित दस्तावेज तैयार कर नया लोन हासिल कर लिया गया, जिससे बैंकिंग सिस्टम की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, इस घोटाले में बैंक के ब्रांच मैनेजर और क्रेडिट मैनेजर की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, वहीं पैनल एडवोकेट और मूल्यांकनकर्ता इंजीनियर पर भी गलत रिपोर्ट देने के आरोप हैं, जिसके आधार पर लोन स्वीकृत किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि मेसर्स आबू रोड लाइंस के संचालक करामत खान ने 2016 में खाता खोलकर 10 लाख रुपये का लोन लिया था और 2017 में लोन लिमिट बढ़ाने के लिए इंदौर की ग्रीन पार्क कॉलोनी स्थित मकान के फर्जी दस्तावेज पेश कर 33 लाख रुपये का लोन पास करवा लिया।
लोन की रकम न चुकाने पर दिसंबर 2019 में खाता NPA घोषित हुआ, लेकिन बाद में सामने आया कि वही संपत्ति पहले से Indian Bank में गिरवी थी और 2021 में उसकी नीलामी भी हो चुकी थी, इसके बावजूद दोबारा उसी पर लोन लिया गया।
फिलहाल ईओडब्ल्यू ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र के तहत मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है और आने वाले दिनों में इस घोटाले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

