उज्जैन। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर मंदिर के शिखर पर ब्रह्मध्वज का भव्य ध्वजारोहण किया जाएगा, लगातार दूसरे वर्ष होने वाला यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सम्राट विक्रमादित्य के काल की लगभग 2000 साल पुरानी गौरवशाली परंपरा के पुनरुद्धार का प्रतीक है, जिसे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में फिर से जीवंत किया जा रहा है
यह ब्रह्मध्वज शक्ति, साहस और चतुर्दिक विजय का प्रतीक माना जाता है, केसरिया रंग के इस विशेष ध्वज की बनावट भी अनोखी है जिसमें दोनों ओर पताकाएं होती हैं और बीच में सूर्य का अंकन किया जाता है, जो तेज, ऊर्जा और विजय का संदेश देता है, धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य को सृष्टि और जीवन का आधार माना गया है, इसलिए इस ध्वज का सीधा संबंध सूर्योपासना से भी जुड़ा हुआ है
ध्वजारोहण से पहले विशेष पूजन-अर्चन और सूर्य आराधना की जाएगी, जिससे इस परंपरा की शुरुआत विधि-विधान के साथ होगी, इतिहास के अनुसार महाकाल मंदिर में यह परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है और इसका विशेष धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व रहा है
बताया जाता है कि वर्षों पहले मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज उड़कर प्रसिद्ध विद्वान पंडित सूर्य नारायण व्यास के निवास ‘भारती भवन’ में जा गिरा था, जो इस परंपरा की ऐतिहासिकता को दर्शाता है, अब एक बार फिर इस परंपरा को महाकाल मंदिर से शुरू किया जा रहा है और आने वाले समय में इसे उज्जैन के अन्य प्रमुख मंदिरों के साथ पूरे प्रदेश में विस्तार देने की योजना है, ताकि सनातन संस्कृति और हमारी समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके

