ईरान युद्ध संकट को लेकर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राज्यसभा में अहम संबोधन दिया, जहां उन्होंने साफ कहा कि अगर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध जारी रहा तो इसके गंभीर दुष्परिणाम पूरी दुनिया के साथ भारत पर भी पड़ेंगे और आने वाला समय देश की सबसे बड़ी परीक्षा लेने वाला है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत लगातार ईरान, अमेरिका और इजरायल के संपर्क में है और हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बातचीत की गई है, क्योंकि यही रास्ता भारत के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, ऐसे में कमर्शियल जहाजों पर हमला या इस मार्ग में रुकावट को भारत ने पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है।
उन्होंने चिंता जताई कि हॉर्मुज स्ट्रेट में भारतीय जहाज और क्रू फंसे हुए हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और तेल, गैस व उर्वरक जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई पर असर पड़ा है, लेकिन सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और समाधान के लिए संवाद का रास्ता अपना रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है और अब तक लाखों भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र भी शामिल हैं, हालांकि कुछ हमलों में भारतीयों की मौत और घायल होने की खबरें भी सामने आई हैं, जिनके परिवारों की हर संभव मदद की जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत अब 41 देशों से ऊर्जा आयात कर रहा है और बीते वर्षों में रिफाइनिंग क्षमता और भंडारण को मजबूत किया गया है, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में देश को परेशानी न हो और सप्लाई बनी रहे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने हालात से निपटने के लिए इंटर-मिनिस्ट्रियल और एम्पावर्ड ग्रुप बनाए हैं, जो लगातार आयात-निर्यात और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता पर नजर रख रहे हैं, साथ ही किसानों के लिए खाद की सप्लाई सुनिश्चित करने की भी तैयारी की गई है।
अपने संबोधन में उन्होंने राज्यों से अपील की कि इस चुनौतीपूर्ण समय में सभी को टीम इंडिया की तरह मिलकर काम करना होगा और खासतौर पर कालाबाजारी व जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई करनी होगी, ताकि गरीबों और आम लोगों पर इसका असर कम से कम पड़े और देश इस संकट का मजबूती से सामना कर सके।

