“जनता अब परिवारवाद नहीं, विकास चाहती है” — जनसुराज उम्मीदवार का नीतीश और तेजस्वी पर बड़ा वार!

बिहार की सियासत एक बार फिर गरम है, लेकिन इस बार सुर बदले हुए हैं। जहानाबाद से जनसुराज के उम्मीदवार अभिराम शर्मा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद नेता तेजस्वी यादव पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अब बिहार की जनता पुरानी सोच और परिवारवाद की राजनीति से तंग आ चुकी है। लोग अब बदलाव चाहते हैं — और यही बदलाव प्रशांत किशोर के जनसुराज अभियान के रूप में सामने आ रहा है।

अभिराम शर्मा ने दावा किया कि इस बार जहानाबाद की जनता ने मन बना लिया है — अब वे ऐसे नेताओं को नहीं चुनेंगे जो सिर्फ अपने परिवार के लिए राजनीति करते हैं। जनता अब ऐसे प्रतिनिधि को चुनेगी जो पूरे बिहार की तकदीर बदलने की सोच रखता हो। उन्होंने कहा कि जनसुराज सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि एक आंदोलन है — जनता के हक़ और विकास की लड़ाई का प्रतीक है।

वहीं, अभिराम शर्मा के बेटे अक्षय आनंद ने भी चुनावी मंच से जनता को संबोधित करते हुए कहा — “अब जहानाबाद की जनता ठान चुकी है कि नेता का बेटा अब नेता नहीं बनेगा। इस बार वोट शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मुद्दों पर पड़ेगा। क्योंकि अब यह लड़ाई सत्ता की नहीं, व्यवस्था परिवर्तन की है।”

अक्षय आनंद ने कहा कि प्रशांत किशोर के विज़न ने युवाओं के बीच एक नई उम्मीद जगाई है। गांव-गांव में जनसुराज के प्रति उत्साह देखने को मिल रहा है, लोग खुद आगे बढ़कर इस अभियान से जुड़ रहे हैं।

विपक्ष पर प्रहार करते हुए अभिराम शर्मा ने राजद उम्मीदवार राहुल शर्मा और उनके परिवार पर तीखा वार किया। उन्होंने कहा — “जगदीश शर्मा और उनके परिवार को राजनीति करते 40 साल हो गए, लेकिन जहानाबाद और घोसी आज भी वहीं के वहीं हैं। जनता ने घोसी में इन्हें नकार दिया, अब जहानाबाद में भी जनता इन्हें मौका नहीं देगी।”

उन्होंने एनडीए प्रत्याशी चंद्रेश्वर चंद्रवंशी पर भी तंज कसते हुए कहा — “लोकसभा में जनता ने पहले ही इन्हें अस्वीकार कर दिया, और अब विधानसभा में भी यही हाल रहेगा।”

अंत में अभिराम शर्मा ने कहा — “नीतीश कुमार का पहला कार्यकाल अच्छा था, लेकिन अब बिहार की रफ्तार थम चुकी है। लाखों युवा रोज़गार के लिए राज्य छोड़ने पर मजबूर हैं। पीके यानी प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति को नई दिशा दी है — उन्होंने पहली बार रोजगार और विकास को असली चुनावी मुद्दा बनाया है। अब जनता समझ चुकी है कि बदलाव सिर्फ जनसुराज ही ला सकता है।”

बिहार की ज़मीन पर अब एक नई हवा बह रही है — जनता अब परिवारवाद नहीं, बल्कि विकास का “जनसुराज” चाहती है!

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